बिहार में वायरल हुआ दर्दनाक वीडियो: सड़क पर मां द्वारा बच्ची पिटाई ने सोशल मीडिया पर मचा दी हलचल
सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर न केवल आपके आंखों में आंसू आएंगे, बल्कि दिल में गुस्सा भी भर जाएगा। यह वीडियो बिहार से वायरल हो रहा है और इसकी लंबाई केवल 2 मिनट 5 सेकंड है। लेकिन इस छोटे से वीडियो ने लोगों के दिलों को झकझोर कर रख दिया है और ‘मां’ के ममतामयी रूप पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वायरल क्लिप में देखा जा सकता है कि एक महिला अपनी मासूम बच्ची को बीच सड़क बेरहमी से पीट रही है। बच्ची की चीखें और सहमे हुए चेहरे ने राहगीरों के दिल को झकझोर दिया। कई लोग तुरंत बीच-बचाव करने की कोशिश करते हैं, लेकिन महिला की प्रतिक्रिया ने सभी को हैरान कर दिया। वीडियो में महिला कहती है कि “यह मेरी बात मानना उसकी ज़रूरत है” और अपने व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश करती है।
इस घटना को देखकर सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है। कई लोगों ने लिखा कि बच्ची के साथ यह हिंसा मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की चोट दे सकती है। वहीं कुछ यूजर्स ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की तुरंत जांच हो और बच्ची को सुरक्षित किया जाए।
बिहार पुलिस और बाल संरक्षण संगठनों के अनुसार, इस तरह की घटनाओं में अक्सर घरेलू हिंसा और मानसिक तनाव कारण बनते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि माता-पिता की हिंसात्मक प्रतिक्रिया बच्चों के मानसिक विकास और भावनात्मक स्वास्थ्य पर लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई NGO और बाल सुरक्षा संगठन ने इस मामले पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में न सिर्फ पीड़ित बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, बल्कि ऐसे माता-पिता को सही परामर्श और शिक्षा देना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में यह व्यवहार दोहराया न जाए।
इस वीडियो ने यह भी दिखाया कि सामाजिक जागरूकता और जनता की सक्रियता कितनी महत्वपूर्ण है। वीडियो को देखकर कई राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप किया, जिससे यह साबित होता है कि सामूहिक प्रयास से ऐसे मामलों को रोका जा सकता है।
सोशल मीडिया पर वायरल इस क्लिप ने न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में बाल सुरक्षा और माता-पिता की जिम्मेदारी पर चर्चा छेड़ दी है। लोग यह पूछ रहे हैं कि क्या ममता और हिंसा एक साथ हो सकती है और बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे सही ठहराया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए शिक्षा, जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह साबित किया कि बाल हिंसा पर नज़र रखना और समय पर कार्रवाई करना अत्यंत आवश्यक है। सोशल मीडिया ने इस मामले को सामने लाकर न केवल जागरूकता फैलाई है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि बच्चियों और बच्चों के साथ किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

