सुप्रीम कोर्ट से अथर खान को झटका या राहत? दिल्ली दंगा केस की सुनवाई 4 हफ्ते आगे बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की कथित साजिश से जुड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA मामले में आरोपी अथर खान की जमानत याचिका पर सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ कर रही थी।
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस ने मामले में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अथर खान को पुलिस की ओर से दाखिल जवाब पर अपना पक्ष रखने की अनुमति दी। अब मामले में आगे की सुनवाई निर्धारित समय के बाद होगी।इस घटनाक्रम के बाद अथर खान की जमानत याचिका पर तत्काल फैसला नहीं हो सका है। फिलहाल अदालत ने मामले की सुनवाई को आगे के लिए स्थगित किया है। सुनवाई टलने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी है। याचिका पर अंतिम फैसला आगे की सुनवाई के दौरान ही होगा।
क्या है अथर खान पर आरोप?
अथर खान पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ी कथित साजिश में शामिल होने का आरोप है। जांच एजेंसियों के आरोपों के मुताबिक, वह चांद बाग इलाके में प्रदर्शन आयोजित करने और कथित तौर पर भड़काऊ भाषणों के जरिए हिंसा भड़काने की गतिविधियों में शामिल था।
इन आरोपों के आधार पर अथर खान के खिलाफ UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसे जुलाई 2020 में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से यह मामला कानूनी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुजर रहा है।हालांकि, आरोपों और अदालत में साबित हुए तथ्यों के बीच अंतर होता है। अथर खान के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।
UAPA के तहत दर्ज है मामला
UAPA यानी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम भारत का एक ऐसा कानून है, जिसका इस्तेमाल आतंकवाद और देश की सुरक्षा से संबंधित कुछ गंभीर अपराधों की जांच तथा अभियोजन में किया जाता है। इस कानून के तहत दर्ज मामलों में जमानत के लिए विशेष कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
ऐसे मामलों में अदालत को जमानत पर विचार करते समय कानून में निर्धारित शर्तों और मामले से जुड़े तथ्यों का मूल्यांकन करना होता है। यही वजह है कि UAPA के तहत दर्ज मामलों में जमानत की सुनवाई सामान्य आपराधिक मामलों से अलग कानूनी कसौटियों पर हो सकती है।अथर खान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई भी इसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। दिल्ली पुलिस की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद अब आरोपी को उस जवाब पर अपनी दलीलें रखने का अवसर मिलेगा। इसके बाद अदालत मामले के तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी।
फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों में गई थी 53 लोगों की जान
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई सांप्रदायिक हिंसा ने राजधानी को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। हिंसा के दौरान कई इलाकों में आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं। हालात बिगड़ने के बाद पुलिस और प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी थी।
इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। हिंसा के बाद पुलिस ने कई मामले दर्ज किए और अलग-अलग आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू की। दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामलों में UAPA के तहत भी कार्रवाई की गई।इन मामलों में जमानत, जांच और मुकदमे की प्रक्रिया लंबे समय से न्यायिक विचाराधीन रही है। अथर खान की याचिका भी इसी व्यापक कानूनी घटनाक्रम से जुड़ी हुई है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाले जाने के बाद अब अथर खान को दिल्ली पुलिस के जवाब पर अपना पक्ष रखने की तैयारी करनी होगी। अदालत अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुन सकती है और उसके बाद जमानत याचिका पर आगे विचार करेगी।फिलहाल इस मामले में जमानत को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। अगली सुनवाई में अदालत का रुख और दोनों पक्षों की दलीलें महत्वपूर्ण रहेंगी।

