शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के विधायक उनके काबू में नहीं, इसलिए उम्मीदवारी वापस ली: रामकदम
मुंबई, 6 जनवरी (आईएएनएस)। भाजपा नेता रामकदम ने उन आरोपों को सिरे से खारिज किया, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) की तरफ से यह कहा जा रहा है कि उनके और मनसे के उम्मीदवारों को उम्मीदवारी वापस करने के लिए बाध्य किया गया। रामकदम ने मंगलवार को कहा कि इन आरोपों में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है।
रामकदम ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह आरोप राजनीतिक दुर्भावना से ग्रसित होकर लगाए गए हैं, जिन्हें किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। सच्चाई यह है कि आज की तारीख में शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के विधायक ही उनके काबू में नहीं हैं। यही वजह है कि वो स्वत: अपनी उम्मीदवारी वापस ले रहे हैं।
भाजपा नेता ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के उम्मीदवारों ने किसी दबाव में अपना नाम वापस नहीं लिया है। असल में सच्चाई यह है कि दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों को यह बात अच्छे से पता है कि अब शिवसेना (यूबीटी) का महाराष्ट्र में अस्तित्व नहीं बचा है और मनसे का कोई जनाधार नहीं है। ऐसी स्थिति में चुनाव लड़ने से कोई फायदा होने वाला नहीं है। स्थिति ऐसी बन चुकी है कि आज की तारीख में प्रदेश में इन दोनों ही राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। ऐसी स्थिति में चुनाव जीतने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। इसी वजह से इनकी पार्टी के नेताओं ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है।
भाजपा नेता रामकदम ने तंज कसते हुए कहा कि सच्चाई यह है कि दोनों ही पार्टी के नेता अब इनके काबू में नहीं हैं और आरोप हम पर लगा रहे हैं। ये तो वही बात हो गई कि एक पिता का बच्चा उसके काबू में नहीं है, लेकिन जा रहा है पड़ोसी को डांटने, यह क्या मतलब हुआ? मुझे लगता है कि मौजूदा समय में शिवसेना (यूबीटी) और मनसे को आत्मचिंतन करना चाहिए ताकि उन्हें अपनी विसंगतियों का एहसास हो सके।
रामकदम ने कहा कि अरे भाई, तुम्हारे नेताओं ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है तो इस बारे में हमसे क्या सवाल करते हो? अगर सवाल करना ही है, तो अपनी पार्टी के नेताओं को बुलाकर सवाल करो। स्थिति साफ हो जाएगी, लेकिन तुम ऐसा करोगे नहीं, सिर्फ बेबुनियाद आरोप लगाओगे, लेकिन इससे कुछ मिलने वाला नहीं है।
--आईएएनएस
एसएचके/वीसी

