शिमला: निर्वासित तिब्बतियों ने पंचेन लामा का 37वां जन्मदिन मनाया, रिहाई की उठी मांग
शिमला, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में निर्वासन में रह रहे तिब्बतियों ने 11वें पंचेन लामा गेदुन चोएक्यी न्यिमा का 37वां जन्मदिन विशेष प्रार्थनाओं और अर्पण के साथ मनाया। यह कार्यक्रम जोनांग मठ, तिब्बती महिला संघ और तिब्बती यूथ कांग्रेस की शिमला इकाइयों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। तिब्बती भिक्षु, पुरुष और महिलाएं जोनांग मठ के पास डिंगु हिल प्रार्थना स्थल पर एकत्र हुए और पंचेन लामा की दीर्घायु व शीघ्र रिहाई के लिए प्रार्थना की।
आचार्य कुंगा छोएपेल, जोनांग मठ (तिब्बती बौद्ध धर्म) निर्वासन, संजौली शिमला के शिक्षक ने कहा कि आज पंचेन लामा 37 वर्ष के हो गए हैं, लेकिन आज तक हमें उनके ठिकाने की कोई जानकारी नहीं है। चीन ने उन्हें अपने नियंत्रण में रखा हुआ है; चाहे वे कहीं भी हों, हमें नहीं पता। हम उनकी लंबी आयु और रिहाई के लिए लगातार प्रार्थना कर रहे हैं। भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की अपील भी की। आज भिक्षुओं ने पंचेन लामा की लंबी उम्र और उनकी रिहाई के लिए प्रार्थना की। हम हर साल उनका जन्मदिन मनाते हैं, हालांकि वे चीन के नियंत्रण में हैं और कोई नहीं जानता कि वे कहां हैं।
गौरतलब है कि गेदुन चोएक्यी न्यिमा का जन्म 25 अप्रैल 1989 को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के नगछू क्षेत्र के ल्हारी गांव में हुआ था। मई 1995 में, छह वर्ष की आयु में, उन्हें 14वें दलाई लामा द्वारा 10वें पंचेन लामा का पुनर्जन्म घोषित किया गया था। हालांकि चीन ने इस मान्यता को खारिज कर अपने समर्थक ग्यात्सेन नोरबू को पंचेन लामा नियुक्त कर दिया।
दलाई लामा द्वारा मान्यता दिए जाने के तुरंत बाद, चीनी अधिकारियों ने कथित तौर पर गेदुन चोएक्यी न्यिमा और उनके परिवार को हिरासत में ले लिया। तब से उनके ठिकाने का कोई पता नहीं है, जिससे वे दुनिया के सबसे लंबे समय से लापता राजनीतिक बंदियों में से एक माने जाते हैं। तिब्बती समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने लगातार उनकी रिहाई और उनके बारे में पारदर्शिता की मांग की है। शिमला में इस वर्ष का शांतिपूर्ण आयोजन उनकी रिहाई की मांग को फिर से मजबूती से उठाने का माध्यम बना।
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