वंदे मातरम के सभी 6 छंद अनिवार्य करने पर शशि थरूर ने उठाए सवाल, वीडियो में बोले- यह लोगों पर बोझ डालने जैसा
कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रगीत Vande Mataram के सभी छह छंदों को गाने या बजाने को अनिवार्य बनाने के प्रस्तावित नियम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे गैर-जरूरी बताते हुए कहा कि इससे कार्यक्रमों में शामिल लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
केरल के Thiruvananthapuram में सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान शशि थरूर ने कहा कि वंदे मातरम भारत का राष्ट्रगीत है और जब भी इसे गाया जाता है, लोग सम्मान स्वरूप खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर अधिकांश लोगों को इसके पहले एक या दो छंद ही याद होते हैं और लंबे समय से यही परंपरा चली आ रही है।
थरूर ने कहा कि पारंपरिक रूप से किसी भी कार्यक्रम की शुरुआत में वंदे मातरम गाया जाता था, जबकि समापन पर राष्ट्रगान बजाया जाता था। उनके अनुसार यह व्यवस्था संतुलित और व्यावहारिक रही है।
'पहले दो छंद ही गाए जाते रहे हैं'
कांग्रेस सांसद ने कहा कि अब तक वंदे मातरम के पहले दो छंद ही अधिकांश सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में गाए जाते रहे हैं। नए नियमों के तहत इसके सभी छह छंदों को शामिल करने की बात कही जा रही है, जिनकी कुल अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकेंड बताई जा रही है।
थरूर का मानना है कि कार्यक्रमों में पूरे गीत को अनिवार्य करना आवश्यक नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि इससे कार्यक्रमों की अवधि बढ़ेगी और व्यावहारिक स्तर पर भी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
वंदे मातरम पर फिर छिड़ी बहस
थरूर के बयान के बाद राष्ट्रगीत को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। समर्थकों का कहना है कि राष्ट्रगीत का पूर्ण रूप से गायन राष्ट्रीय भावना को मजबूत करेगा, जबकि आलोचकों का मानना है कि लंबे समय से चली आ रही परंपरा में बदलाव की आवश्यकता पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
फिलहाल, इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है। वहीं, थरूर का बयान राष्ट्रगीत के उपयोग और उससे जुड़ी परंपराओं को लेकर नई चर्चा का केंद्र बन गया है।

