शरीयत के हिसाब से मुस्लिम महिलाओं को जीना चाहिए : रजवी बरेलवी
बरेली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद की ओर से मुस्लिम महिलाओं को लेकर दिए गए एक बयान पर विवाद शुरू हो गया है। वहीं, उनके बयान का ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने समर्थन किया है।
बरेली में आईएएनएस से बातचीत में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि ग्रैंड मुफ्ती ने बिल्कुल सही बात कही है। महिलाओं के सार्वजनिक स्थानों पर जाने को लेकर कही गई बात का मकसद यही है कि महिलाएं शरीयत की रोशनी में अपना जीवन व्यतीत करें। इस्लाम में महिलाओं का सम्मान है, और अगर वे बाहर जाएं तो पर्दे के साथ जाएं। आम तौर पर देखा जा रहा है कि कुछ मुस्लिम महिलाएं बिना हिजाब के बाजारों और पिकनिक स्थलों पर जाती हैं। ऐसे में उनके पहनावे और दूसरे समुदाय की महिलाओं के पहनावे में अंतर दिखाई नहीं देता।
उन्होंने कहा कि मुफ्ती की इच्छा है कि मुस्लिम महिलाएं सम्मान के साथ रहें। महिलाएं घर की जीनत हैं और घर में रहें। हालांकि, अगर वे ऑफिस, स्कूल या कॉलेज जाती हैं तो हिजाब के साथ अपना काम कर सकती हैं। शरीयत ने जिस तरह जीवन व्यतीत करने का निर्देश दिया है, उसी के अनुसार जीवन जीना चाहिए। शरीयत की रोशनी में अमल करने पर हर जगह इज्जत और सम्मान मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि प्रधानमंत्री के मुस्लिम देशों के साथ अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सबसे अधिक यात्राएं भी मुस्लिम देशों में हुई हैं और भारत में भी मुस्लिम देशों के राष्ट्रपति आते रहे हैं।
कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री के बयान पर उन्होंने कहा कि अगर किसी मुस्लिम कार्यक्रम में इस्लाम धर्म को श्रेष्ठ बताया गया तो इसमें गलत क्या है। उन्होंने कहा कि जिसकी जहां आस्था होती है, वह उसी के बारे में बात करता है। उनकी आस्था मक्का और मदीना की यात्रा करने में है और इस आस्था की इजाजत भारतीय संविधान देता है।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मैं मुस्लिम धर्म का अनुयायी हूं, और मेरे लिए इस्लाम धर्म श्रेष्ठ धर्म है।
--आईएएनएस
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