शेयर मार्केट में शेयर प्राइस, टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस क्या होता है? निवेशकों के लिए जानना जरूरी
मुंबई, 6 जनवरी (आईएएनएस)। शेयर बाजार में हर निवेशक के लिए कुछ बुनियादी शब्दों (टर्म्स) को समझना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि बाजार के ये टर्म्स ही निवेशकों के ज्ञान और विश्वास को बढ़ाते हैं और इसी के आधार पर उनके मुनाफे की सीढ़ी ऊंचाई छूती है।
इनमें सबसे अहम हैं शेयर प्राइस, टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस। अगर निवेशक इन तीनों को सही तरह से समझ ले, तो वह नुकसान को कम कर सकता है और समझदारी से निवेश का फैसला ले सकता है।
दरअसल, शेयर प्राइस उस कीमत को कहा जाता है, जिस पर किसी कंपनी का शेयर स्टॉक मार्केट में खरीदा या बेचा जाता है। यह कीमत हर सेकेंड बदलती रहती है और कंपनी के कारोबार, मुनाफे, खबरों, मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी का शेयर बाजार में 500 रुपए पर ट्रेड कर रहा है, तो वही उसका मौजूदा शेयर प्राइस कहलाता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि टारगेट प्राइस वह अनुमानित कीमत होती है, जहां तक किसी शेयर के पहुंचने की उम्मीद की जाती है। निवेशक या एक्सपर्ट यह तय करते हैं कि अगर शेयर सही दिशा में चला यानी ऊपर की ओर भागा, तो उसे किस कीमत पर बेचकर मुनाफा लिया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर आपने किसी शेयर को 200 रुपए में खरीदा है और आपको लगता है कि आने वाले समय में यह 300 रुपए तक जा सकता है, तो यही उस शेयर का टारगेट प्राइस कहलाएगा।
वहीं, स्टॉप लॉस वह कीमत होती है जिस पर निवेशक नुकसान बढ़ने से पहले शेयर बेचने का फैसला करता है। इसका मकसद नुकसान को सीमित रखना होता है। मान लीजिए आपने 200 रुपए में कोई शेयर खरीदा और तय किया कि अगर यह 170 रुपए से नीचे गया तो आप शेयर बेच देंगे। ऐसे में 170 रुपए आपका स्टॉप लॉस होगा। इस तरह टारगेट प्राइस मुनाफा कमाने में मदद करता है और स्टॉप लॉस नुकसान से बचाता है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि शेयर प्राइस से आपको शेयर मार्केट की मौजूदा स्थिति का पता चलता है। टारगेट प्राइस आपको लालच से बचाता है और सही समय पर मुनाफा लेने में मदद करता है। वहीं स्टॉप लॉस आपको बड़े नुकसान से बचाता है। इन तीनों का सही इस्तेमाल निवेश को सुरक्षित और अनुशासित बनाता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि शेयर बाजार में बेहतर निवेश के लिए सिर्फ सही शेयर चुनना ही काफी नहीं होता, बल्कि निवेश के लिए सही रणनीति बनानी भी जरूरी होती है। शेयर प्राइस, टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस को समझकर और अपनाकर निवेशक जोखिम को कम कर सकता है और लंबे समय में बेहतर परिणाम हासिल कर सकता है।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम

