शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक रोकना संविधान की भावना के खिलाफ : सुप्रिया सुले
मुंबई, 18 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने प्रस्तावित परिसीमन बिल को लेकर कहा कि जब तक सरकार विधेयक संसद में पेश नहीं करती, तब तक उस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि न तो बिल और न ही कोई औपचारिक प्रस्ताव अभी तक सामने आया है, इसलिए उसकी सामग्री जाने बिना राय देना जिम्मेदाराना नहीं होगा। पहले बिल पेश होने दिया जाए, उसके बाद उसे पढ़कर पार्टी अपना विस्तृत पक्ष रखेगी।
दिल्ली में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई पर भी सुप्रिया सुले ने चिंता जताई। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी के मुख्य प्रवक्ता अनीश गवांडे से बात की, जो घटनास्थल पर मौजूद थे। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि वह स्वयं एक दिन पहले प्रदर्शन स्थल पर गई थीं। सरकार जिस तरह से काम कर रही है वो देश के लिए सही नहीं है।
सुप्रिया सुले ने कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार है। जिस तरीके से सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाया गया, वह उचित नहीं था और संविधान की भावना के अनुरूप भी नहीं है। भाजपा सरकार हमेशा कुछ न कुछ इस तरह का काम करती रहती है।
उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किए जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के प्रति संवेदनशील और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
जयंत पाटिल की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ हुई बैठक को लेकर उठ रहे सवालों पर भी सुप्रिया सुले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि यह कोई गुप्त बैठक होती तो उसकी तस्वीरें सार्वजनिक नहीं की जातीं।
उन्होंने कहा कि जयंत पाटिल स्वयं खुले तौर पर बैठक में गए, लौटे और तस्वीरें भी साझा कीं। ऐसे में इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करने का कोई औचित्य नहीं है। उनके अनुसार यह एक आधिकारिक मुलाकात थी और इसमें असामान्य कुछ भी नहीं है।
--आईएएनएस
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