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शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए करें हनुमान का स्मरण : महंत बलवीर गिर महाराज

प्रयागराज, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। संगम तट पर स्थित प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर में हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। पवनपुत्र हनुमान के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचे। मंदिर के महंत बलवीर गिर महाराज ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत की।
शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए करें हनुमान का स्मरण : महंत बलवीर गिर महाराज

प्रयागराज, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। संगम तट पर स्थित प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर में हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। पवनपुत्र हनुमान के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचे। मंदिर के महंत बलवीर गिर महाराज ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत की।

इस दौरान उन्होंने बताया कि चैत्र मास की पूर्णिमा को बड़े हनुमान मंदिर में उत्साह और धूमधाम के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस अवसर पर रात 2 बजे से ही भगवान हनुमान का महाअभिषेक शुरू कर दिया गया। महंत ने कहा, "विश्वनाथ ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, हम हनुमान जी के इस जन्मोत्सव को दक्षिण प्रसिद्ध जन्मोत्सव कहते हैं। हनुमान जी महाराज के सभी उत्सव जन्मोत्सव के रूप में ही मनाए जाते हैं। इसलिए हम नए अवसरों को भी खास तौर पर मनाते हैं। खासकर पूर्णिमा तिथि पर श्री बड़े हनुमान जी में बड़े हर्षोल्लास के साथ हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है।"

उन्होंने बताया, "गुरुवार सुबह 2 बजे से ही श्री हनुमान जी का महाभिषेक किया गया। इसके बाद फलों और पुष्पों से खूबसूरत श्रृंगार किया गया। सामान्य दिनों में बंद रहने वाले पट आज खोल दिए गए, जिससे भक्तों को मानस के दर्शन करने का विशेष अवसर मिला।"

महंत बलवीर गिर महाराज ने बताया कि आज यहां सुंदरकांड भजन संध्या का भी आयोजन किया गया है। पूरे दिन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी व्यवस्थाएं की गईं। अगर धूप ज्यादा पड़ती तो छाया की भी व्यवस्था रखी गई थी।

महंत ने सभी दर्शनार्थियों से अपील की, "आज के पावन दिन हनुमान जी महाराज का स्तवन अवश्य करें। घर पर लाल आसन बिछाकर एक दीपक जलाएं और सुंदरकांड का पाठ करें। जितना हो सके हनुमान जी का स्मरण करें। इससे मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।"

प्रयागराज के संगम तट पर स्थित बड़े हनुमान मंदिर (लेटे हुए हनुमान जी) एक पौराणिक और विश्व प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान जी की लगभग 20 फीट लंबी प्रतिमा लेटी हुई (विश्राम) अवस्था में है। यह मंदिर लगभग 600-700 वर्ष पुराना है और मान्यता है कि संगम स्नान के बाद इनके दर्शन के बिना तीर्थयात्रा अधूरी मानी जाती है।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

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