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भव्य ओपनिंग सेरेमनी के साथ हुई 'एशियन गेम्स 2026' की शुरुआत, मनु-पवन ने शान से लहराया 'तिरंगा'

भव्य ओपनिंग सेरेमनी के साथ हुई 'एशियन गेम्स 2026' की शुरुआत, मनु-पवन ने शान से लहराया 'तिरंगा'
भव्य ओपनिंग सेरेमनी के साथ हुई 'एशियन गेम्स 2026' की शुरुआत, मनु-पवन ने शान से लहराया 'तिरंगा'

नागोया, 19 सितंबर (आईएएनएस)। नागोया के मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में शनिवार को 20वें एशियन गेम्स का भव्य उद्घाटन हुआ। इस खास मौके पर पूरे एशिया के खिलाड़ी एक साथ जुटे और महाद्वीप के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक की आधिकारिक शुरुआत हुई।

ओपनिंग सेरेमनी के दौरान स्टेडियम रंग-बिरंगी रोशनी और शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जगमगा उठा। संगीत और उत्साह के माहौल में कुछ समय के लिए मेडल और मुकाबलों की चर्चा पीछे छूट गई, जबकि खिलाड़ियों और दर्शकों ने इस ऐतिहासिक पल का भरपूर आनंद लिया।

जापान के सम्राट नारुहितो ने आइची-नागोया में महाद्वीपीय खेल आयोजन के 20वें संस्करण की शुरुआत की घोषणा की। इसके साथ ही उस कार्यक्रम का औपचारिक आगाज हुआ जिसमें अगले दो हफ्तों में हजारों एथलीट हिस्सा लेंगे। भारत के लिए इस शाम का अपना ही रंग था। स्टेडियम में भारतीय दल की अगुवाई दो बिल्कुल अलग खेल जगत के एथलीट्स ने की — ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर और कबड्डी स्टार पवन सहरावत। हाथ में ऊंचा तिरंगा लिए, यह जोड़ी उस दल का चेहरा बनी जो उम्मीदों और हांग्जो में एशियन गेम्स 2023 में भारत के रिकॉर्डतोड़ अभियान की यादों को साथ लेकर चल रहा था।

भाकर की मौजूदगी ने इस मौके को ओलंपिक वाली चमक दी, जबकि सहरावत ने भारत के सबसे सफल देसी खेलों में से एक का प्रतिनिधित्व किया। उनके पास पिछले एशियन गेम्स में भारत के स्वर्ण पदक जीतने वाले कबड्डी अभियान का हिस्सा रहने का अनुभव भी था। हालांकि, शुरुआत में सहरावत का भाकर के साथ बतौर फ्लैग बियरर होना तय नहीं था। शॉट पुटर तेजिंदरपाल सिंह तूर को भारत का पुरुष ध्वजवाहक चुना गया था, लेकिन एक तकनीकी समस्या के कारण वे समारोह में शामिल नहीं हो सके। आखिरी समय में हुए इस बदलाव ने सहरावत को सुर्खियों में ला दिया और बड़ी सावधानी से तैयार की गई शाम में एक अप्रत्याशित मोड़ जोड़ दिया। मगर जैसे ही भारतीय दल स्टेडियम में दाखिल हुआ, यह बदलाव गौण हो गया।

तिरंगा पूरे मैदान में आगे बढ़ा। एथलीट्स ने भीड़ का अभिवादन किया और कैमरों ने उस पल को कैद किया जो नागोया खेलों की शुरुआती यादों में शुमार रहेगा। यह समारोह प्रतियोगिता से ज्यादा जापान की कहानी बताने पर केंद्रित था। पारंपरिक जापानी तत्वों का आधुनिक प्रदर्शनों, तकनीक और संगीत के साथ मेल हुआ, जिससे एक ऐसा उत्सव तैयार हुआ जिसने देश की समृद्ध विरासत को उसकी आधुनिक पहचान से जोड़ने का प्रयास किया। जापान के सम्राट और साम्राज्ञी की मौजूदगी ने इस मौके की अहमियत और बढ़ा दी।

स्टेडियम के बाहर नागोया शहर ने एशिया भर से आने वाले खिलाड़ियों, अधिकारियों और खेल प्रेमियों के स्वागत के लिए कई दिनों तक तैयारियां की थीं। वहीं, स्टेडियम के अंदर माहौल पूरी तरह उत्सव में बदल गया, जहां रंग-बिरंगी रोशनी, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने ओपनिंग सेरेमनी को यादगार बना दिया।

हालांकि, एथलीट्स के लिए असली सफर तो बस शुरू ही हो रहा था। ओपनिंग सेरेमनी ने उन्हें रुकने, एक साथ खड़े होने और एक समुदाय के तौर पर गेम्स का अनुभव करने का एक खास मौका दिया। जल्द ही वह लक्ष्यों, टाइमिंग, रणनीति, प्वाइंट्स और मेडल की जानी-पहचानी दुनिया में लौट जाएंगे।

भारत नागोया जरूर पहुंचा है, लेकिन हांगझोऊ की यादें अभी भी ताजा थीं। एशियन गेम्स 2023 में भारत ने ऐतिहासिक रूप से 107 मेडल जीते, जिनमें 28 गोल्ड मेडल शामिल थे। उस प्रदर्शन ने मानक और उम्मीदें, दोनों बढ़ा दी हैं। हालांकि, हर एशियन गेम्स की अपनी कहानी होती है। कुछ अध्याय जाने-माने चैंपियंस के नाम होंगे। कुछ उन एथलीट्स के होंगे जो अपने पहले महाद्वीपीय गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं और कुछ सेकंड, एक मुकाबले, एक लिफ्ट या एक फाइनल को अपने करियर का यादगार पल बनाने की उम्मीद कर रहे हैं।

--आईएएनएस

एसएम/आरएसजी

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