शक्तिकांत दास ने भारतीय उद्योगों को दी सलाह, लागत कम करने की जगह 'रेजिलिएंस मैक्सिमाइजेशन' पर करें फोकस
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) एनुअल बिजनेस समिट 2026 में प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया अभूतपूर्व भू-आर्थिक विभाजन से गुजर रही है। ऐसे में उद्योगों को लागत कम करने की बजाय लचीलापन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कंपनियों को पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर नई रणनीति अपनानी होगी ताकि वे अनिश्चितताओं का बेहतर तरीके से सामना कर सकें।
शक्तिकांत दास ने भारतीय उद्योगों के लिए 7 बिंदुओं का एजेंडा भी बताया, जिसमें संगठनात्मक मजबूती बढ़ाना, बैलेंस शीट को मजबूत करना, नए सप्लाई चेन बनाना, उपलब्ध मानव संसाधन का कौशल विकास, नए बाजारों में विस्तार, भविष्य के लिए रणनीतिक निवेश और अनुसंधान और विकास पर खर्च बढ़ाना शामिल है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार कई बड़े झटकों से गुजर रही है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है और स्थिरता के साथ विकास जारी रखा है।
उन्होंने कहा कि भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, बैंकिंग प्रणाली, कम कर्ज वाला कॉर्पोरेट सेक्टर और मजबूत घरेलू स्थिति ने अनिश्चित वैश्विक माहौल में स्थिरता बनाए रखी है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नीतियों जैसे ऊर्जा परिवर्तन, बुनियादी ढांचे में भारी निवेश और मुक्त व्यापार समझौते ने भारत को कठिन हालात में भी बेहतर स्थिति में रखा है।
दास ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने कई बड़े सुधार किए हैं जैसे मुद्रास्फीति लक्ष्य प्रणाली, दिवालियापन कानून, जीएसटी, व्यापार सुगमता और श्रम सुधार कानून। उन्होंने कहा कि भारत के विकास लक्ष्य 'विकसित भारत 2047' की दिशा में सरकार का फोकस लगातार सुधारों पर रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार दुर्लभ खनिज, महत्वपूर्ण खनिज, जहाज निर्माण, कपास उत्पादन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता पर काम कर रही है।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने सुधारों के प्रति सरकार की गहरी प्रतिबद्धता की सराहना की। सीआईआई के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने भी इसी भावना को दोहराते हुए विवाद समाधान और उत्पादन कारकों को भविष्य में सुधारों के लिए विचारणीय क्षेत्रों के रूप में उल्लेख किया। ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने तीन क्षेत्रों पर प्रकाश डाला जहां सुधार शुरू किए जा सकते हैं। पहला- पारेषण और ग्रिड स्थिरता, दूसरा- कोयले से संपीड़ित गैस में परिवर्तन और तीसरा- वितरण दक्षता।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एमएसएमई को एफटीए के बारे में जानकारी का प्रसार, भारतीय उद्योग का वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण और अनुसंधान एवं विकास तथा कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करना ऐसे क्षेत्र हैं जो उद्योग को भविष्य में अनिश्चितताओं का बेहतर ढंग से सामना करने के लिए तैयार करने में सहायक होंगे।
--आईएएनएस
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