शाहदरा साइबर पुलिस ने स्टॉक ट्रेडिंग इन्वेस्टमेंट फ्रॉड का किया पर्दाफाश, एक अपराधी ओडिशा से गिफ्तार
नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा ने स्टॉक ट्रेडिंग इन्वेस्टमेंट फ्रॉड का पर्दाफाश करते हुए ओडिशा से साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है। स्टॉक मार्केट, आईपीओ में निवेश के बहाने शिकायतकर्ता से 4.75 लाख की धोखाधड़ी की गई थी। सिर्फ दो महीनों में आरोपी के बैंक अकाउंट में लगभग 2.97 करोड़ जमा हुए थे। यह बैंक अकाउंट पूरे भारत में साइबर धोखाधड़ी की 17 शिकायतों से जुड़ा हुआ है।
राम चंद्र यादव की शिकायत पर साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा में 1 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि अनजान लोगों ने उनसे व्हाट्सएप इन्वेस्टमेंट ग्रुप "बुल मार्केट धन क्लब एच 10608" के ज़रिए संपर्क किया। इस ग्रुप में धोखेबाजों ने खुद को एक्सपर्ट स्टॉक मार्केट ट्रेडर बताया और उन्हें ज्यादा और पक्के रिटर्न का वादा करके शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ में पैसे निवेश करने के लिए उकसाया। शुरू में धोखेबाजों ने कथित इन्वेस्टमेंट ऐप पर नकली ट्रेडिंग मुनाफा दिखाया और इस तरह उसका भरोसा जीत लिया।
राम चंद्र ने बताया कि जालसाजों की बातों पर भरोसा करके उसने यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए 4,75,000 रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। शिकायतकर्ता ने बताया कि बाद में जब उसने वह कथित मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो धोखेबाजों ने प्रोसेसिंग और विड्रॉल चार्ज के नाम पर और 12 लाख रुपये की मांग की। इस पर शिकायतकर्ता को एहसास हुआ और पुलिस से संपर्क किया।
राम चंद्र के केस को सुलझाने के लिए साइबर शाहदरा की एक समर्पित टीम बनाई गई। जांच के दौरान टीम ने धोखाधड़ी की रकम से जुड़े बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन का गहराई से विश्लेषण किया। जांच से पता चला कि धोखाधड़ी की रकम में से लगभग 3.75 लाख रुपये सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के अकाउंट में जमा किए गए थे। यह "फ्यूजन एंटरप्राइजेज" के नाम से खोला गया एक कॉर्पोरेट खाता पाया गया, जिसके खाताधारक सुब्रत कुमार साहू और संतोष कुमार लेंका थे। फर्म का रजिस्टर्ड पता भुवनेश्वर, जिला खुर्दा, ओडिशा पाया गया। बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर का भी तकनीकी विश्लेषण किया गया। सिम सुब्रत कुमार साहू के नाम पर रजिस्टर्ड पाई गई।
कानूनी प्रक्रिया का पालन करने और लगातार तकनीकी जांच के बाद, आरोपी का पता लगाया गया और 33 वर्षीय सुब्रत कुमार साहू को ओडिशा से गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ के दौरान, आरोपी ने बताया कि उसने गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन को आसान बनाने के लिए कई बैंक खाते खोले और उनका इंतजाम किया था। उसने लगभग 7 बैंक खाते खोले थे, जिनमें कॉर्पोरेट और सेविंग्स दोनों तरह के खाते शामिल थे, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर संदिग्ध और गैर-कानूनी लेन-देन के लिए किया जाता था।
सुब्रत के मोबाइल फोन की जांच के दौरान, बैंक खातों और उनसे हुए लेन-देन के बारे में सह-आरोपियों के साथ हुई बातचीत मिली। आरोपी ने यह भी बताया कि संबंधित बैंक खाते से जुड़ा सिम कार्ड बाद में फेंक दिया गया था। खाते की विस्तृत जांच से पता चला कि लगभग दो महीने की अवधि में खाते में लगभग 2.97 करोड़ जमा किए गए थे।
जांच में यह भी पता चला कि आरोपी सुब्रत कुमार साहू, सह-आरोपी संतोष कुमार लेंका के साथ बैंक खाते से संबंधित लेन-देन व गतिविधियों के सिलसिले में हवाई मार्ग से गुवाहाटी असम गया था। इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और पूरे वित्तीय लेन-देन का पता लगाने के लिए आगे की जांच की जा रही है।
जांच में एक अहम बात सामने आई है कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की 17 शिकायतें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के उस अकाउंट से जुड़ी पाई गई हैं।
जांच से पता चला है कि धोखाधड़ी करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप ग्रुप और टेलीग्राम चैनल के जरिए संभावित पीड़ितों से संपर्क करते हैं और खुद को एक्सपर्ट स्टॉक ट्रेडर, इन्वेस्टमेंट एडवाइजर या फाइनेंशियल मार्केट प्रोफेशनल बताते हैं।
वे स्टॉक मार्केट और आईपीओ इन्वेस्टमेंट से गारंटीड और ज्यादा रिटर्न का वादा करके पीड़ितों को लुभाते हैं। शुरुआत में पीड़ितों को तुलनात्मक रूप से कम रकम इन्वेस्ट करने के लिए मनाया जाता है। नकली इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म, ऐप का इस्तेमाल करके झूठा मुनाफा दिखाया जाता है और कुछ मामलों में भरोसा जीतने के लिए पीड़ित को थोड़ी रकम वापस भी की जा सकती है। एक बार जब पीड़ित का भरोसा बन जाता है, तो धोखाधड़ी करने वाले अधिक मुनाफे का वादा करके उन्हें बड़ी रकम इन्वेस्ट करने के लिए मनाते हैं। काफी पैसा इन्वेस्ट हो जाने के बाद पीड़ित को नकली प्लेटफॉर्म पर बहुत अधिक मुनाफा या नुकसान दिखाया जाता है।
जब पीड़ित पैसा निकालने की कोशिश करता है, तो धोखाधड़ी करने वाले टैक्स, वेरिफिकेशन, कंप्लायंस, विड्रॉल चार्ज या दूसरे झूठे कारणों से और पैसे की मांग करते हैं।
एक बार जब ज़्यादा से अधिक पैसा निकाल लिया जाता है, तो धोखाधड़ी करने वाले जवाब देना बंद कर देते हैं, पीड़ित को ब्लॉक कर देते हैं या बातचीत पूरी तरह बंद कर देते हैं। ठगी के पैसे को इधर-उधर करने और उसकी लेयरिंग (कई अकाउंट्स में घुमाने) के लिए धोखाधड़ी करने वालों को कई बैंक अकाउंट्स की ज़रूरत होती है।
लोगों को पैसे के बदले बैंक अकाउंट खोलने या उनका एक्सेस देने के लिए लुभाया जाता है, जिनका इस्तेमाल बाद में साइबर धोखाधड़ी से मिले पैसे को रूट करने के लिए किया जाता है।
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सोशल मीडिया ग्रुप या अनजान इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश करते समय सावधान रहें। नागरिकों को गारंटी या बहुत ज़्यादा रिटर्न के दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए और कोई भी पैसा ट्रांसफर करने से पहले इन्वेस्टमेंट एडवाइजर या प्लेटफॉर्म की जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंकिंग क्रेडेंशियल, यूपीआई पिन शेयर न करें, अपने बैंक खाते का एक्सेस न दें। साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड होने पर तुरंत सही साइबर क्राइम रिपोर्टिंग चैनल के जरिए घटना की रिपोर्ट करें और बिना देरी किए अपने बैंक को सूचित करें।
--आईएएनएस
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