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सीमावर्ती क्षेत्रों का सफर तय करेंगे इलेक्ट्रिक वाहन, सेना प्रमुख ने किया रवाना

सीमावर्ती क्षेत्रों का सफर तय करेंगे इलेक्ट्रिक वाहन, सेना प्रमुख ने किया रवाना
सीमावर्ती क्षेत्रों का सफर तय करेंगे इलेक्ट्रिक वाहन, सेना प्रमुख ने किया रवाना

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय सेना का एक दल हिमालय के दुर्गम रास्तों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की क्षमता परखेगा। यह दल दिल्ली से भारत के अंतिम गांव माणा तक, फिर पूर्वोत्तर की ओर बढ़ेगा। सेना हरित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में यह अनूठी पहल कर रही है।

इस यात्रा में नाथू ला और बुम ला जैसे ऊंचाई वाले दर्रों को पार करना भी शामिल है। ये दर्रे समुद्र तल से 4,500 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित हैं। इतनी ऊंचाई पर कम तापमान, कठिन चढ़ाई और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रदर्शन इस अभियान को खास बनाता है।

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 12 अक्टूबर को दिल्ली छावनी स्थित मानेकशॉ केंद्र से ‘स्टैलियंस पैन-हिमालयन ईवी राइडर्स एक्सपीडिशन’ (स्पेयर) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह दल लगभग 4,850 किलोमीटर लंबा है। यह अभियान हिमालय, गंगा के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर भारत के विविध भौगोलिक क्षेत्रों से होकर गुजरेगा।

इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल परिवहन, तकनीकी नवाचार और साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करना है। अभियान की शुरुआत दिल्ली छावनी से हुई है। यहां से अभियान में शामिल सवार सबसे पहले उत्तराखंड के माणा गांव पहुंचेंगे। इसके बाद दल उत्तर प्रदेश के गंगा के मैदानी इलाकों से होते हुए पूर्व दिशा में आगे बढ़ेगा और हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में प्रवेश करेगा।

अभियान का समापन 16 नवंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में स्थित वालोंग युद्ध स्मारक पर होगा। यह तारीख वालोंग दिवस के साथ मेल खाती है। इस अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य यह आकलन करना है कि इलेक्ट्रिक वाहन कठिन पहाड़ी रास्तों और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कितने भरोसेमंद साबित होते हैं। लंबी दूरी की यात्रा के दौरान उनकी क्षमता, सहनशक्ति और व्यावहारिक उपयोगिता को परखा जाएगा।

इसके लिए भारतीय सेना के संचालन संबंधी अनुभव और सहयोगी कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा। अभियान से यह समझने में मदद मिलेगी कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किस हद तक किया जा सकता है। यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है। इससे दुर्गम इलाकों में परिवहन के नए विकल्पों और उभरती तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं का भी आकलन होगा।

--आईएएन

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