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मैक्सिको से अमेरिका गए शख्स की हिरासत में मौत: गुस्से में लोग, राष्ट्रपति ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

मैक्सिको सिटी, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। बेहतर जिंदगी और रोजगार की तलाश में सीमा पार गया एक शख्स अपने घर नहीं लौटा, बल्कि उसके मौत की खबर ने सबको दहला दिया। 49 वर्षीय एलेजांद्रो कैबरेरा क्लेमेंटे की 11 अप्रैल 2026 को अमेरिका में हिरासत के दौरान मौत हो गई, जिसने पूरे मैक्सिको में मातम और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है।
मैक्सिको से अमेरिका गए शख्स की हिरासत में मौत: गुस्से में लोग, राष्ट्रपति ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

मैक्सिको सिटी, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। बेहतर जिंदगी और रोजगार की तलाश में सीमा पार गया एक शख्स अपने घर नहीं लौटा, बल्कि उसके मौत की खबर ने सबको दहला दिया। 49 वर्षीय एलेजांद्रो कैबरेरा क्लेमेंटे की 11 अप्रैल 2026 को अमेरिका में हिरासत के दौरान मौत हो गई, जिसने पूरे मैक्सिको में मातम और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, काबरेरा क्लेमेंते को अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) ने हिरासत में रखा था। उन्हें लुइजियाना के एक डिटेंशन सेंटर में उनकी सेल में बेहोशी की हालत में पाया गया। अधिकारियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस घटना ने सिर्फ एक परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया है। मैक्सिको के कई हिस्सों में इस मौत को लेकर नाराजगी और आक्रोश देखने को मिल रहा है। आम लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या बेहतर भविष्य की तलाश में सीमा पार करना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।

मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम पार्डो ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए अमेरिका से जवाब मांगा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रणाली की विफलता है, जो हिरासत में रखे गए लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रही है। शीनबाम ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

हाल के वर्षों में आईसीई हिरासत में प्रवासियों की मौत के कई मामले सामने आए हैं, जिससे अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियों और डिटेंशन सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर में सख्त हुई नीतियों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। उनके काल में मेक्सिको के 15 लोगों की आईसीई हिरासत में मौत हो चुकी है।

मैक्सिको सरकार ने अमेरिका से मांग की है कि हिरासत केंद्रों की स्थिति में सुधार किया जाए, चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए और मैक्सिकन अधिकारियों को नियमित निरीक्षण की अनुमति दी जाए। साथ ही, यह भी संकेत दिए गए हैं कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ले जाया जाएगा, ताकि मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोका जा सके।

वैसे मैक्सिको और अमेरिका के बीच तल्खी इस साल जनवरी में बढ़ी।तब, जब ट्रंप ने ऐलान किया कि वह क्यूबा को तेल भेजने वाले किसी भी देश पर टैरिफ लगा देंगे। इस कदम का सीधा असर मेक्सिको पर पड़ा, जो वर्षों से क्यूबा को तेल भेजता आ रहा है। हालांकि, शीनबाम ने बेमन से क्यूबा को तेल भेजना रोक दिया, लेकिन उन्होंने ट्रंप प्रशासन के सत्ता बदलने के दबाव को चुनौती देना जारी रखा है।

शीनबाम ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा, "चाहे मानवीय कारण हो या व्यापारिक कारण, मेक्सिको को ईंधन भेजने का पूरा अधिकार है।" उन्होंने क्यूबा पर ट्रंप की ऊर्जा नाकेबंदी को "अन्यायपूर्ण" बताया और अमेरिकी सरकार पर प्रतिबंधों के जरिए क्यूबा का "दम घोंटने" का आरोप लगाया है।

--आईएएनएस

केआर/

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