सावन का प्रथम सोमवार: ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में उमड़ा आस्था का सैलाब, शाही सवारी का श्रद्धालुओं को इंतजार
खंडवा, 3 अगस्त (आईएएनएस)। सावन के प्रथम सोमवार पर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर पूरी तरह शिवमय हो गई। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल चतुर्थ ज्योतिर्लिंग श्री ओंकारेश्वर और श्री ममलेश्वर मंदिर में सोमवार सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर परिसर, नर्मदा घाट और प्रमुख मार्गों पर हर-हर महादेव, बोल बम और ओम नमः शिवाय के जयघोष लगातार गूंजते रहे। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों शिवभक्त और कांवड़िए भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और पूजन-अर्चन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
सावन के पहले सोमवार का विशेष महत्व होने के कारण तड़के से ही दर्शन की लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने नर्मदा जल से भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और देश की खुशहाली की कामना की। मंदिर प्रशासन के अनुसार दर्शन और जलाभिषेक का क्रम देर रात तक जारी रहने की संभावना है।
ओंकारेश्वर की विशेष धार्मिक मान्यता इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग पहचान देती है। यहां नर्मदा नदी के उत्तर तट पर भगवान ओंकारेश्वर और दक्षिण तट पर भगवान ममलेश्वर विराजमान हैं। मान्यता है कि दोनों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से एक पूर्ण ज्योतिर्लिंग दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि सावन माह में यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र दोपहर में निकलने वाली भगवान ओंकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर की पारंपरिक शाही सवारी रहेगी। दोनों मंदिरों से भगवान के चल-विग्रह नर्मदा तट पर लाए जाएंगे, जहां पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजन के बाद नौका विहार कराया जाएगा। इसके बाद शाही सवारी नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकलेगी। जगह-जगह श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करेंगे और पूरा नगर शिवभक्ति में सराबोर दिखाई देगा।
भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस और मंदिर ट्रस्ट ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर और प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है, अतिरिक्त पुलिस बल, मेडिकल टीम और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। यातायात व्यवस्था को भी सुचारु रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन और आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सावन के प्रथम सोमवार पर ओंकारेश्वर में आस्था, श्रद्धा और शिवभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। नर्मदा तट की आध्यात्मिक छटा, भगवान शिव के जयघोष और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने तीर्थनगरी को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया है।
वहीं ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख में स्थित रावण मंदिर पर भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। माना जाता है कि रावण का जन्म इसी बिसरख गांव में हुआ था और यहां पर शिवलिंग प्रकट हुआ था इस वजह से इस गांव की मान्यता बहुत ज्यादा है। इसी मंदिर में बने शिवलिंग पर रावण ने अपना सर काट कर शिवजी के शिवलिंग पर चढ़ाया था इसी के बाद उसको 10 सिर की शक्ति प्रताप हुई थी
--आईएएनएस
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