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सावन : 23 वर्ष बाद सोमवार को नागपंचमी का दुर्लभ संयोग, गंगाजल मिलाकर अभिषेक करने से विशेष फलदाई

सावन : 23 वर्ष बाद सोमवार को नागपंचमी का दुर्लभ संयोग, गंगाजल मिलाकर अभिषेक करने से विशेष फलदाई
सावन : 23 वर्ष बाद सोमवार को नागपंचमी का दुर्लभ संयोग, गंगाजल मिलाकर अभिषेक करने से विशेष फलदाई

नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। इस सावन के पवित्र महीने की शुरुआत 30 जुलाई से हुई है, जो 28 अगस्त तक चलेगा। इस बार सावन के महीने में चार सोमवार पड़ रहे हैं। इस वर्ष सावन की सोमवारी पर दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। इस बार सबसे अधिक चर्चा तीसरे सोमवार की हो रही है। तीसरे सोमवारी पर खास संयोग बन रहा है, जो पूरे महीने का सबसे शुभ और विशेष दिन माना जा रहा है।

3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए देशभर के शिवालयों में पहुंच रहे हैं। इस दिन सुकर्मा योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। आर्थिक परेशानियों, कर्ज या धन संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए भगवान शिव का विशेष जलाभिषेक करना चाहिए।

10 अगस्त को सावन का दूसरा सोमवार है। इस दिन सोमवारी व्रत के साथ-साथ त्रयोदशी तिथि और प्रदोष व्रत का अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस शुभ संयोग पर भगवान शिव की आराधना का दोगुना फल मिलता है। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक और रूद्राभिषेक करने से मनोकामना पूरी होती है। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा व दूध अर्पित करना चाहिए।

17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार है। 23 वर्ष बाद सावन का सोमवार और नाग पंचमी एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिससे 'सोमवती नाग पंचमी' का महासंयोग बन रहा है। इस दिन शिवलिंग पर चंदन, बेलपत्र, और दूध में गंगाजल मिलाकर अभिषेक करने से विशेष पुण्य मिलेगा। इसके साथ ही इस दिन सर्वार्ध सिद्ध योग और शिववास का भी अद्भुत संयोग बन रहा है।

24 अगस्त को सावन का चौथा सोमवार है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि का संयोग बन रहा है। यह सावन महीने का आखिरी सोमवार होगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा करना विशेष फलदाई होगा। शिवलिंग पर जल और गंगाजल चढ़ाने के बाद नारियल और काले तिल, बेलपत्र, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर भगवान शिव की आरती करने से मनोकामना पूरी होती है।

--आईएएनएस

एसडी/पीएम

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