'सवाल पूछने वाले को दिमागी नक्सल कह देते हैं', भाजपा-आरएसएस पर भड़के नसीम सिद्दीकी
मुंबई, 17 अगस्त (आईएएनएस)। एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने सोमवार को महाराष्ट्र और देश की राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विचारधारा के स्तर पर कुछ संगठनों में समानताएं दिखाई देती हैं। उन्होंने आरएसएस की तुलना जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान से करते हुए आरोप लगाया कि इन संगठनों की विचारधारा लोगों को जोड़ने के बजाय विभाजित करने और हिंसा की ओर ले जाने वाली है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी कुछ लोग गांधीजी के हत्यारे का महिमामंडन करते हैं।
कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण के गोपीनाथ मुंडे को लेकर दिए गए बयान पर नसीम सिद्दीकी ने कहा कि गोपीनाथ मुंडे अब इस दुनिया में नहीं हैं और वह भाजपा के बड़े नेताओं में शामिल रहे। गोपीनाथ मुंडे केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। वह एक बड़े और होनहार नेता थे और उनके निधन के इतने समय बाद इस प्रकार की चर्चा करना निरर्थक है। किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में, जो अब इस दुनिया में नहीं है, लंबे समय बाद इस तरह की राजनीतिक चर्चाएं करने के बजाय इन्हें बंद किया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई के उस दावे पर भी नसीम सिद्दीकी से सवाल किया गया, जिसमें कथित तौर पर कहा गया है कि एकनाथ शिंदे कभी कांग्रेस में आने के लिए तैयार थे। सिद्दीकी ने कहा कि वह इस घटनाक्रम के प्रत्यक्ष गवाह नहीं रहे हैं। यदि ऐसी कोई बात हुई थी तो संबंधित नेता या उस घटनाक्रम से जुड़े लोग ही बेहतर बता सकते हैं। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज दल-बदल की राजनीति आम हो गई है। सत्ता और पैसे के लिए राजनीतिक नेताओं के दल बदलने की स्थिति में यह कहना मुश्किल है कि कौन कब कांग्रेस में जाएगा और कौन भाजपा में शामिल हो जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रधानमंत्री से मुलाकात पर सिद्दीकी ने कहा कि ऐसी मुलाकात स्वाभाविक है। महाराष्ट्र और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार है। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों भाजपा से हैं। ऐसे में बैठक में पार्टी से जुड़े विषयों के साथ-साथ महाराष्ट्र के विकास से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। इसे जरूरत से ज्यादा राजनीतिक नजरिए से देखने की आवश्यकता नहीं है।
भरत गोगावले को रायगढ़ का पालकमंत्री बनाए जाने के मुद्दे पर महायुति में संभावित मतभेद को लेकर भी नसीम सिद्दीकी से सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि किसी जिले का पालकमंत्री कौन होगा, इसका फैसला मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में मुख्यमंत्री के फैसले पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता हैं और महायुति के भीतर क्या निर्णय लिए जा रहे हैं, यह उनका आंतरिक मामला है।
'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर नसीम सिद्दीकी ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और प्रधानमंत्री की नजर में देश का कोई भी बुद्धिजीवी व्यक्ति, जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है, उसे दिमागी नक्सल कह दिया जाता है। अगर कोई व्यक्ति बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक नीति, विदेश नीति या देश की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाता है तो उसे भाजपा-आरएसएस की ओर से दिमागी नक्सल कहे जाने का खतरा रहता है। यदि इस तरह की परिभाषा को स्वीकार किया जाए तो देश में करोड़ों लोगों को ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा सकता है।
वंदे मातरम को लेकर भाजपा के सोनिया गांधी और कांग्रेस के विरोध पर भी नसीम सिद्दीकी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी मूल रूप से इटली की नागरिक थीं, लेकिन राजीव गांधी से विवाह के बाद उन्होंने भारतीय परंपराओं और मूल्यों को स्वीकार किया तथा पूरा जीवन भारत को समर्पित किया। एक समय ऐसा भी आया, जब सोनिया गांधी देश की प्रधानमंत्री बन सकती थीं, लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाए जाने का रास्ता चुना। सोनिया गांधी की नागरिकता या देशप्रेम पर सवाल उठाना राजनीतिक रूप से अनर्गल बातें हैं।
--आईएएनएस
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