सत्यभामा' के किरदार से अमर हुईं कुचिपुड़ी नृत्यांगना शोभा नायडू, नृत्य को पेशे के तौर पर अपनाने के लिए किया प्रेरित
मुंबई, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। आमतौर पर ऐसा नहीं देखा गया है कि कोई डांसर किसी खास रोल की पहचान बन जाए, लेकिन शोभा नायडू उन प्रमुख कुचिपुड़ी नर्तकियों में से एक हैं, जिन्होंने न केवल देश और दुनियाभर में कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य शैली का प्रदर्शन किया, बल्कि लोगों को नृत्य को पेशे के तौर पर अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। बुधवार को शोभा नायडू की पुण्यतिथि मनाई जाएगी। इस मौके पर आइए हम आपको उनकी प्रमुख उपलब्धियों के बारे में बताते हैं।
शोभा नायडू एक प्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना, शिक्षिका और कोरियोग्राफर थीं। उनका जन्म 1956 में आंध्र प्रदेश के अनकापल्ले में हुआ था। उनके पिता के.वी. नायडू शुरू में डांस के प्रति उनके झुकाव के खिलाफ थे और चाहते थे कि वह डॉक्टर बनें। हालांकि उनकी मां सरोजिनी देवी ने कला के प्रति उनके जुनून का हमेशा समर्थन किया।
शोभा को बचपन से ही शास्त्रीय नृत्य शैली 'कुचिपुड़ी' में गहरी रुचि थी। उन्होंने राजमुंदरी में पी.एल. रेड्डी की देखरेख में नृत्य का प्रशिक्षण शुरू किया और बाद में मद्रास (अब चेन्नई) में प्रसिद्ध कुचिपुड़ी गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से आगे का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने चेन्नई के क्वीन मैरी कॉलेज से डिग्री हासिल की।
शोभा, कुचिपुड़ी के मशहूर और सम्मानित उस्ताद वेम्पति चिन्ना सत्यम की शिष्या थीं और आगे चलकर इस कला की प्रमुख कलाकारों में से एक बनीं। सांस्कृतिक नृत्य-नाटकों में 'सत्यभामा' का किरदार निभाने के लिए मशहूर शोभा नायडू ने हैदराबाद में श्रीनिवास कुचिपुड़ी आर्ट एकेडमी की प्रिंसिपल के तौर पर वर्षों काम किया। अपने पूरे करियर के दौरान उन्होंने हजारों छात्रों को ट्रेनिंग दी और कई नृत्य-नाटकों की कोरियोग्राफी की।
शास्त्रीय नृत्य में उनके अहम योगदान के लिए शोभा नायडू को भारत सरकार ने 2001 में पद्म श्री और इससे पहले 1991 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। इसके अलावा, उन्हें आंध्र प्रदेश सरकार से भी कई पुरस्कार और सम्मान मिले।
शोभा नायडू के व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनके पति अर्जुन राव एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी है। दोनों की एक बेटी है, जिसका नाम साई शिवरंजनी हैं। 4 अक्टूबर 2020 को हैदराबाद में 64 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनके योगदान के लिए वे सदा याद की जाएंगी।
--आईएएनएस
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