'बुरी किस्मत का सिलसिला टूटा', चाइना मास्टर्स का खिताब जीतने के बाद बोले सात्विक-चिराग
शेन्जेन, 6 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की स्टार बैडमिंटन जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने चाइना मास्टर्स का खिताब अपने नाम किया। खिताब जीतने के बाद भारतीय जोड़ी ने इसे एक 'बुरी किस्मत के सिलसिले' का अंत और एशियन गेम्स 2026 से पहले बड़ा बूस्ट बताया।
पिछले महीने नई दिल्ली में हुई बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक से चूकने वाली भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन के जी तिंग और रेन शियांग यू को 11-21, 21-13, 21-17 से हराया। भारतीय जोड़ी इससे पहले दो बार चीनी खिताब जीतने के करीब पहुंची थी, लेकिन टीम को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, इस बार सात्विक और चिराग पहली बार इस खिताब को अपने नाम करने में सफल रहे। उन्होंने अपनी पिछली दो हारों को भी याद किया।
जीत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सात्विक ने कहा, "यहां खेलना हमेशा अच्छा लगता है। हम हमेशा चोट से उबरने के बाद यहां खेले हैं। मुझे लगता है कि 2024 में ओलंपिक के बाद हम यहां खेले थे। हम सेमीफाइनल तक पहुंचे थे। फिर पिछले साल हम खेले; हम अच्छी फॉर्म में नहीं थे, फिर भी फाइनल खेले। मुझे लगता है कि यह भी चोट से वापसी के बाद का टूर्नामेंट था, जिसने हमें बहुत आत्मविश्वास दिया।"
सात्विक और चिराग टूर्नामेंट के ज्यादातर मैचों में तीन गेम तक खेले। फाइनल में पहला गेम हारने के बाद उन्होंने वापसी की और खिताब जीता। उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि आज हमने अपना संयम बनाए रखा। हमने गलतियां नहीं कीं। तो आज के मैच से यह एक सकारात्मक बात रही, और हम बस अपने गेम प्लान पर टिके रहे। हमने यहां आने से पहले एक गेम प्लान बनाया था। हम वही करना चाहते थे। मुझे लगता है कि आज वह काम कर गया, और हम सच में खुश हैं कि हमने उस बुरी किस्मत के सिलसिले को तोड़ दिया। 2026 में यह हमारा दूसरा खिताब है। हम सच में बहुत खुश हैं।"
पहले गेम में भारतीय खिलाड़ियों में आमतौर पर दिखने वाला आक्रामक तेवर नहीं था। दूसरे और तीसरे गेम में वापसी करने के लिए कोच को उन्हें कोर्ट के किनारे से जोश दिलाना पड़ा। "हां, मुझे नहीं लगता कि पहले गेम में आक्रामकता की कमी थी, लेकिन हम सही स्ट्रोक नहीं खेल रहे थे। हम ऐसा खेल खेल रहे थे जो उनके लिए फायदेमंद था। जब हम ऐसा खेल खेलते हैं जो उनके लिए फायदेमंद होता है, तो वे पूरी ताकत से हमला करते हैं। उनके खिलाफ खेलने के लिए आपको कोई जगह नहीं मिलती क्योंकि वे बहुत तेज और आक्रामक होते हैं। इसी वजह से दूसरे गेम में जब हमने शुरुआत की, तो हम आक्रामक होना चाहते थे, लेकिन सोच-समझकर आक्रामकता दिखाना चाहते थे। चिराग यही कह रहे थे।"
सात्विक ने तीसरे गेम में अपनी सर्विसिंग स्किल्स का शानदार प्रदर्शन किया और लगातार पांच प्वाइंट जीतकर मैच अपने नाम किया। सात्विक ने कहा, "मुझे लगता है कि ऐसा बहुत कम होता है जब मुझे अपनी सर्विस पर पांच प्वाइंट मिलते हैं। आमतौर पर चिराग ही गेम को आगे बढ़ाते हैं। हालांकि, मुझे फिर से लगता है कि क्वार्टर फाइनल में जब हमने किम एस्ट्रुप और एंडर्स स्कारुप रासमुसेन के खिलाफ खेला था, तो उस मैच से हमें आत्मविश्वास मिला। स्थिति वैसी ही थी, स्कोर 17-17 से बराबर था और हम पीछे चल रहे थे। तब मैं सर्विस कर रहा था। मैंने सर्विस की ज्यादा प्रैक्टिस की है क्योंकि मैं चोटिल था। जब मैं चोटिल था, तब भी मैं बहुत सारी सर्विस की प्रैक्टिस करता था। इसी कारण मुझे लगता है कि इससे मुझे पिछले दो टूर्नामेंट में मदद मिली है।"
ये दोनों खिलाड़ी चाइना मास्टर्स से मिले आत्मविश्वास को एशियन गेम्स में भी साथ लेकर जाएंगे, जो 19 सितंबर से शुरू हो रहा है। चिराग ने कहा, "जाहिर है कि एशियन गेम्स में जाने से पहले कोई खिताब जीतना निश्चित रूप से बहुत बड़ा बूस्ट देता है कि हां, हम जिस दिशा में काम कर रहे हैं, वह सही है। मगर हां, मुझे लगता है कि हम घर वापस जाएंगे, अपनी पूरी ताकत लगाएंगे, अगले 10 दिनों तक ट्रेनिंग करेंगे और एशियन गेम्स में पूरी ताकत के साथ खेलेंगे।"
--आईएएनएस
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