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अगर राहुल गांधी सर्वदलीय बैठक को गंभीरता से नहीं ले रहे तो सरकार की आलोचना क्यों करते हैं: संजय निरुपम

मुंबई, 25 मार्च (आईएएनएस)। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं तो वे सरकार की आलोचना क्यों करते हैं।
अगर राहुल गांधी सर्वदलीय बैठक को गंभीरता से नहीं ले रहे तो सरकार की आलोचना क्यों करते हैं: संजय निरुपम

मुंबई, 25 मार्च (आईएएनएस)। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं तो वे सरकार की आलोचना क्यों करते हैं।

मुंबई में शिवसेना नेता संजय निरुपम ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ शोर मचाना जानती है। कांग्रेस को सिर्फ सरकार को कमजोर साबित करने के लिए अलग-अलग मुद्दों पर सरकार की आलोचना करने का मौका चाहिए और वह उस मौके का लाभ उठाती रहती है। पश्चिम एशिया में जो एक युद्धजन्य संकट है, बल्कि युद्ध का संकट है, जिसमें तमाम खाड़ी देश एक-दूसरे पर बमबारी कर रहे हैं, खासकर ईरान बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों पर हमला कर रहा है, उसकी वजह से पूरी एनर्जी सिक्योरिटी खतरे में आ गई है।

उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और गैस की सप्लाई पूरी दुनिया में बाधित हो सकती है, क्योंकि सबसे बड़ा खजाना गल्फ कंट्री के पास है। ऐसे में उस पूरे संकट पर क्या करना चाहिए, कैसे करना चाहिए, इसके लिए केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें सभी दलों की राय मांगी जा रही है। इस बैठक में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हिस्सा नहीं लिया। मतलब लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष पश्चिम एशिया के संकट को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। अगर वे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं तो कोई बात नहीं, यह उनका फैसला है। लेकिन फिर इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना करना बंद करें और सरकार को अपने ढंग से इस संकट से निपटने दें।

अजित पवार मामले में रोहित पवार द्वारा कर्नाटक में जीरो एफआईआर कराए जाने पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि यह पूरी एफआईआर एक प्रकार से राजनीति से प्रेरित लग रही है, क्योंकि घटना महाराष्ट्र में घटी है। हादसा बारामती में हुआ है। अजित दादा पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार पार्टी के नेताओं के साथ जाकर मुख्यमंत्री को यह निवेदन दे चुकी हैं कि सीबीआई इस पूरे प्रकरण की जांच करे। हमारे मुख्यमंत्री ने आधिकारिक तौर पर मीडिया को बताया कि उन्होंने राज्य सरकार की तरफ से एक चिट्ठी केंद्र सरकार को भेजी है, ताकि सीबीआई जांच शुरू की जा सके। यह एक प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया के तहत काम चल रहा है। अब इस प्रक्रिया के तहत चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने के बाद सीबीआई जांच होगी या नहीं, कहीं न कहीं केंद्र सरकार इस पूरे केस के अंदर जो तथ्य हैं, जो शक है, जो संदेह है, उसके आधार पर एक निर्णय लेकर अंतिम फैसला करेगी।

उन्होंने कहा कि रोहित पवार जिस तरह से उतावले हो रहे हैं, यह समझ नहीं आता है। उनके कभी अजित पवार के साथ अच्छे संबंध नहीं थे, अजित दादा भी उन्हें पसंद नहीं करते हैं। रोहित पवार जो राजनीति कर रहे हैं, वह निंदनीय है। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और वे रोहित पवार के कंधे पर बंदूक रखकर निशाना साध रही है।

24 अकबर रोड खाली करने के नोटिस पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि बहुत सारी पॉलिटिकल पार्टियां हैं, जिनके पास लुटियंस जोन में जो सरकारी बंगले हैं, उनमें पार्टी का मुख्यालय चलाने के लिए उन्हें अलॉट किया गया था। अब उस अलॉटमेंट के खिलाफ मामला कोर्ट में गया था। कोर्ट ने आदेश दिया तो सरकार ने फैसला लिया और धीरे-धीरे तमाम पॉलिटिकल पार्टियों को निर्देश दिया गया कि आपको हम एक प्लॉट दे रहे हैं, वहां पर आप अपने कार्यालय बना लें और ये लुटियंस के सरकारी बंगले जो हैं, उनका उपयोग कार्यालय के तौर पर करना बंद करें। अब 24 अकबर रोड जो ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का मुख्यालय है, इसे लेकर केंद्र सरकार ने कई बार नोटिस दिए हैं।

संजय निरुपम ने कहा कि यह नोटिस केंद्र सरकार द्वारा किसी दुर्भावना से ग्रस्त होकर नहीं दिया गया, बल्कि कोर्ट के आदेश के आधार पर एक्शन ले रही है। अब बार-बार कांग्रेस पार्टी, जिसका अपना मुख्यालय बन गया है, वह मुख्यालय दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर है, और उसका उद्घाटन भी हुआ है। ऐसे में जब मुख्यालय बन गया तो सरकारी बंगले पर कब्जा करके क्यों बैठ हैं? यह कांग्रेस वालों की पुरानी आदत है, वे हमेशा सरकारी जमीन पर कब्जा करके अपनी दुकान चलाने में लगे रहते हैं।

मुंबई के फेरीवालों को लेकर संजय निरुपम ने कहा कि मुंबई में फेरीवालों का एक बड़ा समूह है, और ये वर्षों से यहां पर फेरी लगाकर अपना जीवन यापन करते हैं। 12 साल पहले केंद्र सरकार ने पार्लियामेंट में पास करके फेरीवालों को संरक्षण देने के लिए कानून बनाया था, लेकिन आज तक वह कानून लागू नहीं हुआ था।

उन्होंने कहा कि मैं एक अरसे से इस विषय पर लड़ रहा हूं। उस कानून में तरह-तरह के प्रावधान हैं, जिसके तहत टाउन वेंडिंग कमेटी बनाई जाए और उसका चुनाव कराया जाए। उसमें फेरीवालों को प्रतिनिधित्व दिया जाए, और वही टाउन वेंडिंग कमेटी मुंबई के फेरीवालों को नियमित तौर पर स्थापित करने का काम करेगी कि किसको कहां धंधा करना है, कहां बैठना है। यह विषय एक अरसे से लंबित है। मुझे बड़ी खुशी हुई कि मुंबई हाई कोर्ट ने इस पूरे विषय की विस्तृत तौर पर जांच करके एक फैसला दिया है और महानगरपालिका और मुंबई पुलिस को यह निर्देश दिया है कि इस कानून को लागू किया जाए और फेरीवालों को परेशान करने की जो हरकतें चल रही हैं, उसे बंद किया जाए, खासकर बांग्लादेशियों को भगाने के नाम पर जिस तरीके से पूरे मुंबई के फेरीवालों को उजाड़ने का काम हो रहा है।

उन्होंने कहा कि मैं अवैध फेरीवालों की बात नहीं कर रहा हूं। जो वैध फेरीवाले हैं, उन्हें उजाड़ने का एक षड्यंत्र चल रहा है, उसके खिलाफ यह आदेश है। मैं इस आदेश का समर्थन करता हूं।

--आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी

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