सरकारी योजनाओं में नहीं होता हिंदू-मुस्लिम, पात्रता के आधार पर मिल रहा लाभ: मौलाना शहाबुद्दीन
बरेली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 साल के सार्वजनिक कार्यकाल के संदर्भ में मौलाना शहाबुद्दीन ने सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के मिल रहा है। योजनाओं का लाभ देने में धर्म के बजाय पात्रता और व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को आधार बनाया जा रहा है।
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है। जमीनी स्तर पर भी यह देखा जा सकता है कि इन योजनाओं का लाभ लेने वालों में अलग-अलग समुदायों के लोग शामिल हैं। राशन वितरण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राशन लेने के लिए हिंदू और मुसलमान दोनों लाइन में खड़े होते हैं और वहां धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। वहां यह देखा जाता है कि व्यक्ति गरीब है या नहीं और वह योजना के लिए पात्र है या नहीं। पात्र होने पर उसे योजना का लाभ दिया जाता है।
मौलाना ने उन तमाम आरोपों को गलत बताया, जिनमें कहा जाता है कि मुसलमानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा कहना जमीनी हकीकत के खिलाफ है, जहां-जहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब लोगों के लिए आवास बने, वहां पात्र गरीब मुसलमानों को भी योजना का लाभ मिला है। सरकारी योजनाओं में किसानों को दी जाने वाली सहायता में भी हिंदू-मुसलमान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। किसान की आर्थिक स्थिति और पात्रता देखी जाती है, न कि उसका धर्म। लोगों को गरीबी और पात्रता के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। योजनाओं में न हिंदू देखा जाता है और न मुसलमान, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को ध्यान में रखा जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा और रक्षा के साथ-साथ उनकी आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए काम करे। प्रधानमंत्री मोदी इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं और सरकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है।
--आईएएनएस
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