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सरकार को संविधान से मतलब नहीं, अपने एजेंडे के तहत विधेयक पास कराने की कोशिश : कीर्ति आजाद

सरकार को संविधान से मतलब नहीं, अपने एजेंडे के तहत विधेयक पास कराने की कोशिश : कीर्ति आजाद
सरकार को संविधान से मतलब नहीं, अपने एजेंडे के तहत विधेयक पास कराने की कोशिश : कीर्ति आजाद

नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस)। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। इसी बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद कीर्ति आजाद ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस सत्र में भी सरकार अपने एजेंडे के तहत कई बड़े विधेयक पास कराने की कोशिश करेगी, जिनमें डीलिमिटेशन और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

उन्होंने कहा, "देखते हैं आगे क्या होता है। सरकार लगातार डीलिमिटेशन बिल पास कराने की कोशिश में है। इनकी कोशिश है कि किसी तरह दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया जाए ताकि अपनी मर्जी से बदलाव किए जा सकें। मौजूदा स्थिति चिंताजनक है।"

कीर्ति आजाद ने कहा कि पहले यह सत्र 13 जुलाई से शुरू होना था, जिसे अब 20 जुलाई कर दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस बदलाव के पीछे क्या कारण है, यह किसी को स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने हिसाब से फैसले लेती है और संविधान की भावना को दरकिनार किया जा रहा है।

इस बीच, संसद में जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े 'कैश कांड' मामले की जांच रिपोर्ट को इसी सत्र में सदन में पेश किए जाने की चर्चा पर कीर्ति आजाद ने कहा कि यह कदम सही दिशा में है लेकिन उन्होंने साथ ही यह सवाल भी उठाया कि जब पहले भी कई मामलों में ऐसी रिपोर्टें आईं, तो उन पर आगे क्या कार्रवाई हुई।

कीर्ति आजाद ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि "जो चीज भाती है, वह आप करते हो। जो चीज आपको भाती नहीं, आप करते नहीं। विपक्ष तो केवल नाम मात्र रह गया है। कोई बोले तो बोलने नहीं दिया जाता। अगर बोलता है तो उसका उसमें से काट दिया जाता है, डिलीट कर दिया जाता है और सत्ता पक्ष वाले जो चाहते हैं, बोलते रहते हैं, जिसके बारे में जो चाहते हैं, बोलते हैं, वह चलता रहता है। यह सारी चीजें हैं जो बहुत गंभीर हैं।"

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर कीर्ति आजाद ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह मामला केवल चोरी नहीं बल्कि डकैती है। उन्होंने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "जो लोग राम के नाम पर यहां तक आ गए, वही मंदिर को लूट रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि जिस समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गृह मंत्रालय के माध्यम से किया गया था, उसकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ 80 लाख का मामला नहीं है बल्कि इससे कहीं बड़ा मामला है। इसे ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे पहाड़ खोदकर चुहिया निकली हो लेकिन हकीकत इससे अलग है।"

कीर्ति आजाद ने यह भी आरोप लगाया कि जांच को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उनका कहना है कि हर जगह सरकार के लोग ही हैं, जो मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

चंद्रिमा भट्टाचार्य के बंगाल टीएमसी चीफ समेत सभी पदों से इस्तीफा देने को लेकर उन्होंने कहा, "अच्छा है चले गए। बहुत बढ़िया है चले गए। अच्छा है ऐसे लोग जा रहे हैं, पता लग रहा है जिन्होंने सत्ता का आनंद उठाया।"

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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