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सरकार ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को किया ध्वस्त, पेपर लीक से युवाओं का भविष्य बर्बाद: अखिलेश यादव

सरकार ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को किया ध्वस्त, पेपर लीक से युवाओं का भविष्य बर्बाद: अखिलेश यादव
सरकार ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को किया ध्वस्त, पेपर लीक से युवाओं का भविष्य बर्बाद: अखिलेश यादव

प्रयागराज, 29 जून (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को भाजपा सरकार पर शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में धांधली, सरकारी स्कूलों के बंद होने और बढ़ती बेरोजगारी ने युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा और रोजगार की स्थिति नहीं सुधरी तो देश का जनसांख्यिकीय लाभ (डेमोग्राफिक डिविडेंड) एक बड़ी चुनौती में बदल जाएगा।

प्रयागराज में आयोजित 'विजन इंडिया' कार्यक्रम में 'शिक्षा-परीक्षा: क्यों ध्वस्त हुई व्यवस्था' विषय पर आयोजित संवाद को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा किसी भी देश की बुनियाद होती है। जब शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली कमजोर होती है तो सबसे बड़ा नुकसान युवाओं और देश के भविष्य को होता है।

उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक, परीक्षाओं का निरस्त होना और बेरोजगारी बढ़ने से युवाओं में मानसिक तनाव बढ़ा है तथा कई अभ्यर्थियों ने निराशा में आत्महत्या तक कर ली। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने केजी से लेकर पीजी तक की पूरी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। हजारों सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं, विश्वविद्यालय राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार हैं और शिक्षा का बजट लगातार घटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा और शोध पर खर्च करने के बजाय विज्ञापनों पर अधिक धन खर्च कर रही है।

अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय विभिन्न गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है, जबकि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांवों के प्राथमिक विद्यालयों को मर्जर के नाम पर बंद किया जा रहा है, जिससे छोटे बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों के रिक्त पदों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि योग्य अभ्यर्थियों को 'नॉट फाउंड सूटेबल' बताकर नियुक्तियां रोकी जा रही हैं। साथ ही भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण की अनदेखी, छात्रवृत्ति में देरी और बढ़ती फीस के कारण गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। सपा अध्यक्ष ने कहा कि नौकरी न मिलने का सबसे अधिक असर बेटियों पर पड़ता है। सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बड़ी संख्या में छात्राओं की पढ़ाई बीच में छूट जाती है, जो देश के विकास के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। पेपर लीक से लेकर भर्ती प्रक्रिया तक पूरा तंत्र प्रभावित है और सरकार अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने से बच रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की प्राथमिकता रोजगार होती तो लगातार भर्ती परीक्षाएं रद्द नहीं होतीं।

अखिलेश यादव ने संविदा भर्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्थायी नौकरियों के बजाय संविदा प्रणाली लागू कर आरक्षण व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने 69 हजार शिक्षक भर्ती का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि आरक्षण के साथ अन्याय किया गया और संविदा व्यवस्था के जरिए सामाजिक न्याय पर चोट पहुंचाई जा रही है।

उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 20 हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालय बंद किए जा चुके हैं और इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 'शिक्षा अच्छी होगी, परीक्षा अच्छी होगी तो तरक्की पक्की होगी,' इसी संकल्प के साथ युवाओं को बेहतर भविष्य देने का प्रयास किया जाएगा।

--आईएएनएस

विकेटी/डीकेपी

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