सारा खलीफा से माता हारी तक: मौत की सजा पाने वाली वो महिलाएं जिनकी कहानी आज भी चर्चा में
नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। कैमरे के सामने अपराध और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने वाली मिस्र की टीवी प्रस्तोता सारा खलीफा खुद एक ऐसे मामले के केंद्र में हैं, जिसने दुनिया का ध्यान खींचा है। काहिरा की एक अदालत ने उन्हें ड्रग्स मैनुफैक्चरिंग और तस्करी से जुड़े मामले में 11 अन्य लोगों के साथ मौत की सजा सुनाई है। अदालत के मुताबिक मामला संगठित आपराधिक गिरोह और नशीले पदार्थों के निर्माण से जुड़ा था। फैसले के खिलाफ अपील का रास्ता अभी खुला है।
39 वर्षीय सारा खलीफा ‘मिशन इंपॉसिबल’ नाम के कार्यक्रम से चर्चित हुई थीं, जिसमें अपराध और सुरक्षा से जुड़े विषय उठाए जाते थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक मामले में 750 किलोग्राम से ज्यादा नशीले पदार्थ और उन्हें बनाने की सामग्री बरामद की गई। हालांकि खलीफा ने आरोपों से इनकार किया है।
सारा के मामले ने दुनिया की ऐसी महिलाओं की याद दिला दी है, जिनकी जिंदगी अचानक अदालत, अपराध और मौत की सजा के इर्द-गिर्द सिमट गई। इनमें कुछ को फांसी दे दी गई, जबकि कुछ की सजा आखिरी वक्त में पलट गई।
पहला नाम है माता हारी का। 20वीं सदी की शुरुआत में यूरोप की सबसे चर्चित डांसर्स में शुमार माता हारी का असली नाम मार्गरेथा जेला था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन पर जर्मनी के लिए जासूसी करने का आरोप लगा।
1917 में फ्रांस की सैन्य अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। 15 अक्टूबर 1917 को महज 41 वर्ष की उम्र में उन्हें फायरिंग स्क्वाड के सामने खड़ा कर दिया गया।
उनकी मौत ने उन्हें अपराधी से ज्यादा एक रहस्यमयी ऐतिहासिक किरदार बना दिया। अब भी बात मौत की सजा के औचित्य को लेकर उठती रहती है।
पाकिस्तान की आसिया बीबी का मामला बिल्कुल अलग था। ईसाई महिला पर ईशनिंदा का आरोप लगा और 2010 में उन्हें सजा-ए-मौत सुनाई। लंबा अरसा जेल में गुजारा और मौत की सजा का सामना करती रहीं। यह मामला इतना संवेदनशील था कि उनके समर्थन में आवाज उठाने वाले पाकिस्तान के दो प्रमुख नेताओं सलमान तासीर और शाहबाज भट्टी की भी हत्या कर दी गई।
फिर 31 अक्टूबर 2018 को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पलट दी। अदालत ने उन्हें बरी करने का आदेश दिया और करीब नौ साल बाद उनके लिए मौत का खतरा टल गया।
ईरान की कुर्द मानवीय कार्यकर्ता पख्शान अजीजी भी इस फेहरिस्त का बड़ा नाम है। उनका मामला आधुनिक दौर में सबसे ज्यादा चर्चित मामलों में शामिल है। उन्हें जुलाई 2024 में ‘सशस्त्र विद्रोह’ से जुड़े आरोप में मौत की सजा सुनाई गई। जनवरी 2025 में ईरान के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा बरकरार रखी।
एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक अजीजी ने मानवीय और सामाजिक कार्य किए थे और उनके मामले में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर गंभीर सवाल उठे। मानवाधिकार संगठनों ने उनकी सजा पर रोक लगाने की मांग की है। उनकी कहानी बाकी मामलों से अलग है, क्योंकि यहां कहानी खत्म नहीं हुई है।
अमेरिका की वेल्मा बारफील्ड का नाम अपराध इतिहास में ‘डेथ रो ग्रैनी’ के तौर पर दर्ज हुआ। उन्हें जहर देकर हत्या करने के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी।
1978 में उन्हें अपने मंगेतर की हत्या का दोषी ठहराया गया। बाद में उन्होंने कई अन्य लोगों को जहर देने की बात भी स्वीकार की। उनकी मौत की सजा पर लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली, लेकिन आखिरी अपीलें भी खारिज हो गईं।
2 नवंबर 1984 को उन्हें घातक इंजेक्शन दिया गया। वह अमेरिका में 22 वर्षों के बाद मृत्युदंड पाने वाली पहली महिला बनीं।
अमेरिका की ऐलीन वुर्नोस का नाम दुनिया की सबसे चर्चित महिला सीरियल किलर के मामलों में लिया जाता है। उन पर फ्लोरिडा में कई पुरुषों की हत्या का आरोप लगा। अदालत ने उन्हें छह मौत की सजाएं सुनाईं। करीब एक दशक मौत की सजा वाले सेल में बिताने के बाद 2002 में उन्हें घातक इंजेक्शन दिया गया। उनकी जिंदगी और अपराधों पर फिल्में, किताबें और यहां तक कि ओपेरा तक बने।
उनका मामला इसलिए भी असाधारण रहा क्योंकि वुर्नोस ने आखिर में अपनी अपीलें छोड़ने का फैसला किया और कहा कि वह अपने किए की सजा भुगतने के लिए तैयार हैं।
--आईएएनएस
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