सपा सरकार में कांवड़ यात्रा और रामनवमी के जुलूस बाधित किए जाते थे : भूपेंद्र सिंह
लखनऊ, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्रियों और बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता ने तीखा निशाना साधा है। मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह ने धार्मिक आयोजनों और पत्रकारों के प्रति सपा के रवैये पर सवाल उठाए। मंत्री संजय निषाद ने सामाजिक न्याय और संविधान के मुद्दे पर सपा को घेरा। वहीं, बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सपा द्वारा रावण के रूप में दिखाने वाले एआई वीडियो, महंगाई के आरोपों पर पलटवार किया है।
कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में कांवड़ यात्रा, रामनवमी के जुलूस और हिंदुओं के धार्मिक आयोजनों को बाधित किया जाता था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में सभी वर्गों को बिना भेदभाव त्योहार मनाने का अवसर मिला है। उन्होंने अखिलेश यादव पर तुष्टीकरण की राजनीति करने और बहुसंख्यक समाज को अपमानित करने का आरोप लगाया। भूपेंद्र सिंह ने पत्रकारों के प्रति सपा के रवैये पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव पत्रकारों के सवालों पर उनकी जाति पूछते हैं और मीडिया को अपमानित करते हैं। उन्होंने सपा से पत्रकार जगत से माफी मांगने की मांग की। साथ ही आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस ने युवाओं को गुमराह कर अराजकता फैलाने का प्रयास किया।
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वो राजनीति में खाना खाने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों को हल कराने के लिए भाजपा के साथ आए हैं। भाजपा इन मुद्दों के समाधान के लिए पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सामाजिक मुद्दों का समाधान नहीं करेगी और इस दिशा में दरवाजे बंद करेगी, तब आगे विचार किया जाएगा।
संजय निषाद ने कहा कि संविधान की मूल भावना समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय पर आधारित है। सभी राजनीतिक दल लोगों को सम्मान, सुरक्षा, समृद्धि, समानता और स्वावलंबन देने की बात करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद अपने वादे भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से जनता अब मोदी और योगी को बुला रही है, क्योंकि उनकी सरकार लोगों के लिए काम कर रही है।
अखिलेश यादव के संविधान बचाने के बयान पर पलटवार करते हुए निषाद ने सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि सरकारी नौकरियों में कुछ विशेष वर्गों के परिवारों का अधिक प्रतिनिधित्व है। उन्होंने सवाल उठाया कि दूसरी जातियों को उनका हक क्यों नहीं मिलना चाहिए? निषाद ने कहा कि संविधान का उद्देश्य सभी को समान अवसर और अधिकार देना है, न कि कुछ वर्गों तक अवसरों को सीमित रखना।
--आईएएनएस
विकेटी/पीएम

