दुनिया में हंगर रेट घटी, भारत ने निभाई अहम भूमिका: संयुक्त राष्ट्र
न्यूयॉर्क, 21 जुलाई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में लगातार तीसरे साल दुनिया में भूख की समस्या में कमी दर्ज की गई। यूएन के अनुसार, एशिया में 'हंगर रेट' सुधार का सबसे बड़ा कारण भारत रहा है।
दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की आबादी वाले भारत में भूख की दर घटकर 10 प्रतिशत से नीचे आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लक्षित कल्याणकारी योजनाओं और कृषि उत्पादकता में वृद्धि ने इस सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका के कई देशों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। इथियोपिया, तंजानिया, जिम्बाब्वे, सेनेगल और जाम्बिया में भूख की स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। वहीं, डोमिनिकन गणराज्य अब वैश्विक भूख मानचित्र में शामिल देशों की श्रेणी से बाहर हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि गाजा में जारी युद्ध का वैश्विक भूख के आंकड़ों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट दीर्घकालिक और लगातार रहने वाले कुपोषण को मापती है, न कि युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न होने वाली तात्कालिक खाद्य असुरक्षा को।
टोरेरो ने कहा कि हाल के समय में गाजा में खाद्य आपूर्ति बढ़ी है, जिससे वहां की स्थिति कुछ हद तक स्थिर हुई है। हालांकि, युद्ध में कृषि ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और कृषि उत्पादन को पूरी तरह बहाल करने में कई वर्ष लगेंगे।
उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य कृषि उत्पादन को फिर से स्थापित करने में मदद करना है, क्योंकि कृषि से जुड़ा बड़ा बुनियादी ढांचा नष्ट हो चुका है।"
हालांकि भूख की समस्या में कमी आई है, लेकिन रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बच्चों में कुपोषण अब भी गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके अलावा महिलाओं में एनीमिया के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है और वयस्कों में मोटापे की समस्या भी लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए अब भी पौष्टिक और संतुलित आहार तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र ने सरकारों से ऐसी नीतियां अपनाने का आह्वान किया है जो भोजन की उपलब्धता के साथ-साथ उसके पोषण स्तर और वहनीयता को भी सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही दुनिया को एक चेतावनी भी दी गई है। कहा है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाएं और वैश्विक व्यापार में व्यवधान इस प्रगति को प्रभावित कर सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र की पांच एजेंसियों ने संयुक्त रूप से रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट ‘द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड’ के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया की लगभग 64.5 करोड़ (645 मिलियन) आबादी, यानी 7.8 प्रतिशत लोग भूख से प्रभावित रहे। यह आंकड़ा 2024 में 8.1 प्रतिशत और 2022 में 8.6 प्रतिशत था।
--आईएएनएस
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