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संवेदनशील सरकार ही संकट में ढाल बनती है, भुलाए गए नायकों को अब मिल रहा सम्मान : मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इतिहास, संस्कृति और समकालीन राजनीति को जोड़ते हुए कहा कि संवेदनशील सरकार ही संकट के समय जनता की रक्षा करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में राजनीतिक कारणों से कई महान नायकों को भुला दिया गया, लेकिन अब उन्हें सम्मान दिलाने का कार्य किया जा रहा है।
संवेदनशील सरकार ही संकट में ढाल बनती है, भुलाए गए नायकों को अब मिल रहा सम्मान : मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इतिहास, संस्कृति और समकालीन राजनीति को जोड़ते हुए कहा कि संवेदनशील सरकार ही संकट के समय जनता की रक्षा करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में राजनीतिक कारणों से कई महान नायकों को भुला दिया गया, लेकिन अब उन्हें सम्मान दिलाने का कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को गोमती नगर स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी के संपूर्ण भवन एवं दो प्रेक्षागृहों के जीर्णोद्धार कार्य का लोकार्पण किया। लगभग 22 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना के तहत आयोजित स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह में उन्होंने ‘रंगभेद’ पत्रिका का विमोचन, प्रदर्शनी का अवलोकन और कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने 1921 की जनगणना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में अकाल और स्पेनिश फ्लू जैसी महामारी के कारण देश की आबादी बढ़ने के बजाय घट रही थी और तीन करोड़ से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी, लेकिन उस समय की सरकार संवेदनहीन बनी रही। उन्होंने कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया लॉकडाउन की स्थिति में थी और प्रवासी श्रमिक अपने घरों को लौट रहे थे, तब राज्य सरकार ने उनके भोजन और सुरक्षित घर वापसी की व्यवस्था की।

उन्होंने कहा कि संवेदनशील सरकार संकट में “फ्रंट फुट” पर आकर जनता की रक्षा करती है। मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक संस्थानों की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी रहा जब समाज में गलत चरित्रों को नायक के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसका दुष्परिणाम सामाजिक मूल्यों पर पड़ा। उन्होंने कहा कि आज स्थिति बदल रही है और रामायण जैसे धारावाहिकों की लोकप्रियता यह दर्शाती है कि समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है। इस दौरान उन्होंने महाराजा सुहेलदेव के शौर्य का उल्लेख करते हुए कहा कि एक हजार वर्ष पूर्व उन्होंने विदेशी आक्रांता सालार मसूद को परास्त कर देश और समाज की रक्षा की थी।

उन्होंने कहा कि पहले जिस स्थान पर सालार मसूद के नाम पर मेले लगते थे, वहीं अब महाराजा सुहेलदेव के स्मारक पर लोग श्रद्धा व्यक्त करने पहुंच रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि इतिहास के कई महापुरुषों को राजनीतिक कारणों से भुला दिया गया था। उन्होंने महाराजा बिजली पासी सहित अन्य स्थानीय नायकों का जिक्र करते हुए कहा कि वोट बैंक की राजनीति के कारण उन्हें उचित स्थान नहीं मिला। अब ऐसे महापुरुषों पर आधारित कार्यक्रम और स्मारक विकसित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कलाकारों और नाट्य संस्थानों से आह्वान किया कि वे वीरांगना अवंतीबाई, उदा देवी, झलकारी बाई और महाराजा सुहेलदेव जैसे नायकों पर आधारित नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तैयार करें, ताकि नई पीढ़ी उन्हें अपना आदर्श बना सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को यह तय करना होगा कि नायक कौन हैं और खलनायक कौन। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाज को खलनायकों का महिमामंडन नहीं करना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पद्मश्री रामगोपाल बजाज, पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी समेत 15 कलाकारों और पूर्व छात्रों को सम्मानित किया। इस मौके पर ‘आनंद मठ’ सहित विभिन्न नाट्य प्रस्तुतियां भी मंचित की गईं, जिन्हें मुख्यमंत्री ने देखा और सराहा। भारतेंदु नाट्य अकादमी के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह आठ दिवसीय समारोह देशभर के कलाकारों को एक मंच पर लाकर भारतीय रंगमंच और सांस्कृतिक विरासत को नई दिशा देने का प्रयास कर रहा है।

--आईएएनएस

विकेटी/एएस

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