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संस्कृति और रिश्तों को मजबूत करने की नई पहल, महाशिवरात्रि के मौके पर मथुरा से आए बाबा विश्वनाथ के लिए उपहार

वाराणसी, 9 फरवरी (आईएएनएस)। 15 फरवरी को होने वाली महाशिवरात्रि को लेकर देशभर के मंदिरों में तैयारियां चल रही हैं। रंग-रोगन से लेकर खास तरह की पोशाक और मिष्ठान बनाना शुरू हो चुका है।
संस्कृति और रिश्तों को मजबूत करने की नई पहल, महाशिवरात्रि के मौके पर मथुरा से आए बाबा विश्वनाथ के लिए उपहार

वाराणसी, 9 फरवरी (आईएएनएस)। 15 फरवरी को होने वाली महाशिवरात्रि को लेकर देशभर के मंदिरों में तैयारियां चल रही हैं। रंग-रोगन से लेकर खास तरह की पोशाक और मिष्ठान बनाना शुरू हो चुका है।

इसी कड़ी में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में मथुरा और अन्य मंदिरों से वस्त्र, मिठाई और फल सहित कई प्रकार की भेंट अर्पित की जा रही है। इस आदान-प्रदान का उद्देश्य अन्य मंदिरों के बीच संस्कृति और रिश्तों को मजबूत करना है।

इस कार्यक्रम को मंदिरों में सफलतापूर्वक चलाने वाले कार्यकर्ता ने आईएएनएस से कहा, "महाशिवरात्रि को लेकर देशभर के मंदिरों से नई पहल शुरू की गई है, जिसमें देश के बड़े मंदिर और हमारी मुहिम से जुड़ने वाले मंदिर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे हमारे सनातन धर्म और मंदिर का जुड़ाव पहले से और ज्यादा मजबूत होगा। जैसे हम इस कार्यक्रम के तहत महाशिवरात्रि पर भेंट लेकर आए हैं, वैसे ही बाकी बड़े मंदिरों में होने वाले त्योहारों पर भी भेंट अर्पित की जाएगी।"

उन्होंने आगे कहा, "देश में लगातार भाषा, खाने, बोली, क्षेत्र और पहनावे के आधार पर अंतर को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है और इसका असर भी कई क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। इस अंतर को हम सभी इस कार्यक्रम और आस्था के जरिए पाटने की कोशिश कर रहे हैं। इसका उद्देश्य देश के सभी मंदिरों को एक दूसरे से जोड़ने का है। भारत के किसी भी भाग में मौजूद मंदिर सनातन का प्रतीक है, जिसे क्षेत्र या बोली के आधार पर बांटना गलत होगा।"

मंदिर में अर्पित की जाने वाली भेंटों की जानकारी देते हुए बताया, "महाशिवरात्रि के मौके पर जम्मू कश्मीर में स्थित माता वैष्णों देवी और दक्षिण में रामेश्वरम और गुजरात से लेकर असम तक के बड़े मंदिरों से भेंटें प्राप्त हो चुकी हैं। आज मुथरा से आई भेंट को अर्पित करने का काम किया जा रहा है क्योंकि भगवान शिव और श्री कृष्ण का संबंध बहुत पुराना है और दोनों ही एक दूसरे को अपना आराध्य मानते हैं। मंदिर से प्रसाद, वस्त्र और फूल बड़ी मात्रा में भेजे गए हैं।"

--आईएएनएस

पीएस/एएस

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