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सांसद काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे को टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने ‘मीडिया में बने रहने की ट्रिक’ बताया

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। इस घटना के बीच भाजपा सांसद सौमित्र खान के इस दावे ने बंगाल की राजनीति को और गरमा दिया है कि टीएमसी के कई सांसद और विधायक संपर्क में हैं। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे को ‘मीडिया में बने रहने की ट्रिक’ करार दिया है।
सांसद काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे को टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने ‘मीडिया में बने रहने की ट्रिक’ बताया

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। इस घटना के बीच भाजपा सांसद सौमित्र खान के इस दावे ने बंगाल की राजनीति को और गरमा दिया है कि टीएमसी के कई सांसद और विधायक संपर्क में हैं। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे को ‘मीडिया में बने रहने की ट्रिक’ करार दिया है।

मीडिया से बातचीत के दौरान टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि अच्छा हुआ कि उन्होंने इस्तीफा दिया। यह पहली बार तो नहीं, वे पहले से ही इस्तीफे देती आई हैं। यह एक स्टाइल है, रोज एक इस्तीफा देंगे तो मीडिया में बने रहेंगे। इसे इतना महत्वपूर्ण नहीं माना जाना चाहिए।

जब उनसे यह पूछा गया कि काकोली घोष ने सांसद से इस्तीफा नहीं दिया है तो उन्होंने कहा कि यह भी देखा जा रहा है, वैसे भी वे स्टेप बाइ स्टेप फैसला ले रही हैं। चुनाव में टीएमसी हार गई। जिसके पास नैतिक शक्ति होगी वे ही टीएमसी में रहेगा।

भाजपा में काकोली घोष के जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर क्या कह सकते हैं? अपने फैसले लेने के लिए हर कोई आजाद है।

सरकारी प्रशासनिक बैठक में टीएमसी के सांसदों और विधायकों के शामिल होने के मामले पर सौगत रॉय ने कहा कि नहीं, हमारी पार्टी की ओर से कोई रोक नहीं थी। मुख्यमंत्री ने उन्हें आमंत्रित किया था। इसलिए, इसका कोई राजनीतिक महत्व नहीं है।

भाजपा सांसद सौमित्र खान के बयान पर सौगत रॉय ने कहा कि सौमित्र खान ने जो कहा, उसका कोई महत्व नहीं है। उन्होंने बस एक अफवाह फैलाई है। हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है।

दूसरी ओर भाजपा सांसद सौमित्र खान ने कहा कि हमारी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व, और राज्य से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य जब भी निर्देश देंगे, तो कई सांसद और विधायक भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार हैं। लेकिन पार्टी जो भी निर्देश देगी वही अंतिम होगा। पार्टी का फैसला ही सबसे बड़ा फैसला है। अभी कई सांसद और विधायक हमारे संपर्क में हैं। हमारी उनसे दोस्ती भी है, कभी-कभी वे दोस्ताना रिश्ते बनाने के लिए भी हमसे संपर्क कर रहे हैं। आप समझ रहे हैं न कि मेरा क्या मतलब है। लेकिन हम बस यही कहेंगे, यह पार्टी का फैसला है।

भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने दावा किया कि ममता बनर्जी के अलावा तृणमूल में कोई नहीं बचेगा। या तो अभिषेक बनर्जी विदेश भाग जाएंगे या जेल चले जाएंगे। तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

राहुल सिन्हा ने फाल्टा विधानसभा का उदाहरण देते हुए कहा कि फाल्टा में तृणमूल के 15 साल पुराने नेता चौथे स्थान पर रहे और उनकी जमानत भी नहीं बची। वहीं अभिषेक बनर्जी ने उसी इलाके में 7 लाख वोटों से जीत हासिल की। स्थिति साफ है कि टीएमसी खत्म होने के कगार पर है।

उन्होंने ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा कि ममता बनर्जी को अपने हाथों से तृणमूल कांग्रेस का साइनबोर्ड हटा देना चाहिए। पार्टी को खत्म कर देना चाहिए। वरना भविष्य में जो अपमान इंतजार कर रहा है, उसे सहन करना मुश्किल हो जाएगा।

टीएमसी नेताओं के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि जब सरकार ही गिर गई तो पार्टी में रहकर क्या करेंगे। इसीलिए छोड़ रहे हैं, क्योंकि भ्रष्टाचार नहीं कर पाएंगे।

राहुल सिन्हा ने स्पष्ट किया कि भाजपा तृणमूल के आंतरिक कलह में नहीं पड़ना चाहती और अपना पूरा ध्यान बंगाल के विकास पर केंद्रित रखेगी।

केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि जब मैं भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष था, तब मैंने और उस समय के नेता प्रतिपक्ष जो अब हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी हैं। हम दोनों ने यह वादा किया था कि जब भी भाजपा की सरकार सत्ता में आएगी, तो हम 'लक्ष्मी भंडार' की जगह 'अन्नपूर्णा भंडार' योजना लाएंगे और इसके तहत दी जाने वाली आर्थिक सहायता में भी बढ़ोतरी करेंगे।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो घोषणा पत्र में वादा किया था, उसे पूरा किया जाएगा।

एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर सुकांत मजूमदार ने कहा कि मैंने अभी तक पूरा फैसला नहीं पढ़ा है, लेकिन मुझे खबरों के जरिए पता चला है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि एसआईआर कानूनी है। हम शुरू से ही कहते आ रहे हैं कि एसआईआर पूरी तरह से कानूनी है और इसे कई बार पहले भी किया जा चुका है, इसलिए इसमें कुछ भी नया नहीं है।

--आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी

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