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'संघ को नेहरू नहीं मिटा सके तो पवन खेड़ा क्या मिटाएंगे', भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा

'संघ को नेहरू नहीं मिटा सके तो पवन खेड़ा क्या मिटाएंगे', भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा
'संघ को नेहरू नहीं मिटा सके तो पवन खेड़ा क्या मिटाएंगे', भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा

नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने सपा सांसद रामजी लाल सुमन के 'वंदे मातरम' वाले बयान पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' के दो छंद गाना कांग्रेस का मुस्लिम लीग के सामने आत्मसमर्पण था। उन्होंने कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा के आरएसएस वाले बयान पर कहा कि जब नेहरू भी आरएसएस को खत्म नहीं कर सके तो खेड़ा कैसे करेंगे?

भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा, "उन दो छंदों को गाना कांग्रेस का मुस्लिम लीग के सामने आत्मसमर्पण था। आज भारत एक आजाद देश है। इस देश में लाखों लोग स्वतंत्रता आंदोलन में 'वंदे मातरम' गाते हुए शहीद हुए थे। कांग्रेस पार्टी ने खुद 'वंदे मातरम' गाते हुए एक आंदोलन चलाया था। इसलिए, ऐसा कुछ कहना पूरी तरह से देश विरोधी बयान है। इससे शहीदों की आत्मा को बहुत ठेस पहुंचेगी।"

सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा था कि लाल किले से वंदे मातरम का गायन देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर हमला है। संविधान सभा में सभी की सहमति से इसके दो छंद ही तय किए गए थे, ताकि सभी धर्मों के लोग इसे गा सकें। अब इसे जबरन थोपना एक एजेंडे का हिस्सा है और भारत की धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा के आरएसएस पर दिए गए बयान का जवाब देते हुए भाजपा सांसद ने कहा, "नेहरू जी ने भी एक बार कहा था कि वह आरएसएस को खत्म कर देंगे। इसलिए, उन्हें आरएसएस को खत्म करने की कोशिश करते रहने दें, लेकिन उनकी कोशिशों के बावजूद, आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा वॉलंटियर संगठन बनकर उभरा है और काम कर रहा है। जब नेहरू में भी आरएसएस को खत्म करने की ताकत नहीं थी, तो वे ऐसा कैसे कर सकते हैं?"

दरअसल, पवन खेड़ा ने कहा था कि भाजपा ने युवा मोर्चा के कार्यकर्ता घुसा दिए हैं। हमें पता है कि क्या हो रहा है। हमारी सरकार आई तो आरएसएस को खत्म कर देंगे। ये अंग्रेजों के तलवे चाटने वाले हैं, हमारा क्या मुकाबला करेंगे। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने झारखंड में 'विधानसभा घेराव' मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह है कि क्या शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को दबाया जाना चाहिए।

इस्कॉन मंदिर में ड्रेस कोड को लेकर उन्होंने कहा कि ये उनकी निजी व्यवस्था है। उनकी परंपराओं के अनुकूल वो जो समझते होंगे, उस हिसाब से निर्णय लिया है।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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