Samachar Nama
×

संगीतकारों की पहली पसंद बन गई थीं शमशाद बेगम, गाए लगभग छह हजार गाने

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमा की गायिका शमशाद बेगम का जन्म 14 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। बचपन से ही संगीत में उनकी रुचि थी। यही वजह है कि उन्होंने बिना किसी प्रशिक्षण के ही, अपनी दमदार आवाज की वजह से पहचान बना ली थी। उन्होंने लगभग छह हजार गाने गाए।
संगीतकारों की पहली पसंद बन गई थीं शमशाद बेगम, गाए लगभग छह हजार गाने

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमा की गायिका शमशाद बेगम का जन्म 14 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। बचपन से ही संगीत में उनकी रुचि थी। यही वजह है कि उन्होंने बिना किसी प्रशिक्षण के ही, अपनी दमदार आवाज की वजह से पहचान बना ली थी। उन्होंने लगभग छह हजार गाने गाए।

वर्ष 1937 में लाहौर और पेशावर रेडियो पर उन्होंने अपना पहला कार्यक्रम दिया था। मास्टर गुलाम हैदर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। वर्ष 1940 में पंजाबी फिल्म यमला जट से उन्होंने फिल्मी सफर की शुरुआत की। 1941 की फिल्म खजांची में उनके गाए गाने 'मेरा हाल वेख के' के साथ कुछ अन्य गानों ने शमशाद बेगम को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई। इसके बाद वह मुंबई आ गई थीं।

मुंबई में नौशाद, ओ.पी. नैय्यर, एस.डी. बर्मन, सी. रामचंद्र जैसे संगीतकारों ने शमशाद बेगम की प्रतिभा को पहचाना। इन संगीतकारों की वह पहली पसंद बन गई थीं। 1940 से 1950 के दशक में वह सबसे ज्यादा पेमेंट पाने वाली गायिकाओं में शामिल हो गई थीं।

शमशाद बेगम के लोकप्रिय गीतों की बात करें तो उनकी 'मेरे पिया गए रंगून' (पटियाला), 'कभी आर कभी पार' (आर पार), 'काजरा मोहब्बत वाला' (किस्मत), 'लेके पहला पहला प्यार' (सीआईडी), 'होली आई रे कन्हाई' (मदर इंडिया) और 'तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर' (मुगल-ए-आजम) जैसे अमर गीत आज भी लोकप्रिय हैं।

लता मंगेशकर के आने के बाद भी अपनी जगह बनाए रखने वाली कुछ गायिकाओं में शमशाद बेगम का नाम शामिल है। उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, मराठी, गुजराती, तमिल, और पंजाबी भाषाओं में लगभग 6000 गाने गाए।

2009 में उन्हें पद्म भूषण और ओ.पी. नैय्यर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। 23 अप्रैल 2013 को 94 वर्ष की आयु में मुंबई में उनका निधन हो गया।

शमशाद बेगम की शादी का किस्सा भी काफी दिलचस्प है। मुस्लिम होकर भी उन्होंने हिंदू से शादी की थी। वर्ष 1932 में शमशाद बेगम गणपत से मिलीं। उस समय शमशाद के घर वाले शादी के लिए लड़का ढूंढ रहे थे, लेकिन शमशाद जिससे प्यार करती थीं, उससे ही शादी करना चाहती थीं। दोनों के घर वाले इसके खिलाफ थे। लोग ताने मारना भी शुरू कर दिए थे, लेकिन अंत में जीत प्यार की हुई। शमशाद और गणपत ने शादी कर ली।

--आईएएनएस

एसडी/डीकेपी

Share this story

Tags