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संदीप कुमार: रेस वॉकिंग को देश में दिलाई बड़ी पहचान

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय एथलेटिक्स में संदीप कुमार का नाम बेहद जाना पहचाना है। संदीप ने ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया है।
संदीप कुमार: रेस वॉकिंग को देश में दिलाई बड़ी पहचान

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय एथलेटिक्स में संदीप कुमार का नाम बेहद जाना पहचाना है। संदीप ने ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया है।

संदीप कुमार का जन्म 1 मई 1986 को महेंद्रगढ़, हरियाणा में हुआ था। उनका पूरा नाम संदीप कुमार पुनिया है। वह भारतीय सेना में कार्यरत हैं। संदीप की दिलचस्पी बचपन से ही खेलकुद में रही, लेकिन उन्होंने उस खेल को चुना जिसकी लोकप्रियता देश में बहुत कम है। पैदल दौड़ (रेस वॉकिंग) के महारथी संदीप ने इस खेल में ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया है।

एक साधारण परिवार से संबंध रखने वाले संदीप का ओलंपिक तक का सफर उनकी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रदर्शन का परिणाम है। पैदल दौड़ में संदीप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

रेस वॉकिंग एक कठिन और तकनीकी खेल है, जिसमें गति के साथ-साथ सही तकनीक बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। संदीप ने इस चुनौती को स्वीकार किया और लगातार अभ्यास के जरिए अपनी तकनीक को निखारा।

राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने और पहचान बनाने के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। संदीप ने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में देश का प्रतिनिधित्व किया।

संदीप को सबसे बड़ा मौका 2016 में रियो में आयोजित हुए ओलंपिक में मिला था। उन्होंने 50 किलोमीटर रेस वॉक में हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में 20 किलोमीटर रेस वॉक में हिस्सा लिया। हालांकि, संदीप पदक नहीं जीत सके, इस मंच पर पहुंचना ही किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, और उन्होंने यहां अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन किया।

संदीप ने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में 10 किलोमीटर रेस वॉक में कांस्य पदक जीता था।

संदीप कुमार की सफलता के पीछे उनकी कड़ी ट्रेनिंग, मजबूत मानसिकता और कोचों का मार्गदर्शन है। रेस वॉकिंग में लंबी दूरी तय करनी होती है, जिसके लिए शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता भी आवश्यक होती है। संदीप ने इन दोनों पहलुओं पर बराबर ध्यान दिया और खुद को लगातार बेहतर बनाते रहे हैं। रेस वॉकिंग को देश में बड़ी पहचान दिलाने में उनका बड़ा योगदान रहा है।

--आईएएनएस

पीएके

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