संवाद न होने से परिवार और समाज में बढ़ती है बिखराव की स्थिति : परमहंस आचार्य
अयोध्या, 26 जुलाई (आईएएनएस)। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने शनिवार को आईएएनएस से बातचीत में छात्र आंदोलनों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के संवाद संबंधी बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद की कमी से विवाद बढ़ते हैं और समस्याओं के समाधान के लिए आपसी बातचीत बेहद जरूरी है।
आईएएनएस से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा, "मोहन भागवत जी ने बहुत महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने कहा कि यदि संवाद नहीं होगा तो विवाद बढ़ेगा। विवाद बढ़ेगा तो परिवार टूटेंगे, समाज बिखरेगा और देश कमजोर पड़ेगा।"
उन्होंने पुरानी शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा, "पहले पढ़ाई के दौरान गीता, रामायण और अन्य शास्त्रों का ज्ञान दिया जाता था। लोगों को अपने धर्म और संस्कृति की ऐसी शिक्षा मिलती थी कि वे अपने बड़ों का सम्मान करते थे। बड़े यदि कोई संकेत भी दे देते थे तो बच्चे उसे समझ लेते थे। आज स्थिति बदल गई है। बच्चों को धर्म और संस्कृति की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही है और संस्कारों का क्षय हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण बच्चों के साथ संवाद का अभाव है।"
उन्होंने कहा कि माता-पिता और परिवार के अन्य बड़ों का दायित्व है कि वे बच्चों के साथ नियमित रूप से बैठकर बातचीत करें। उन्होंने कहा, "बच्चों के सवालों और तर्कों का धैर्यपूर्वक जवाब दीजिए। जब वे संतुष्ट हों, तब उन्हें अपनी संस्कृति, महापुरुषों और भगवद्गीता के बारे में बताइए। जब बच्चों को अपने देश, धर्म और संस्कृति का ज्ञान होगा, तब परिवार और समाज दोनों सशक्त होंगे। इसलिए मोहन भागवत जी ने जो बात कही है, वह समाज और राष्ट्रहित में है।"
उल्लेखनीय है कि देश में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक तथा अनियमितताओं के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद क्षेत्र के आसपास छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इस दौरान छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और सुरक्षा बलों के बीच कई स्थानों पर झड़पें भी देखने को मिली हैं।
--आईएएनएस
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