Samachar Nama
×

समुद्री सुरक्षा व रक्षा रणनीति की दिशा तय करेंगे नौसेना के टॉप कमांडर्स

नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना के टॉप कमांडर की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यहां नौसेना के कमांडर्स समुद्री सुरक्षा, परिचालन तैयारियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए रणनीतिक दिशा तय करेंगे। इसमें नौसेना का शीर्ष नेतृत्व, ऑपरेशनल कमांडर और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। यह नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस हैं।
समुद्री सुरक्षा व रक्षा रणनीति की दिशा तय करेंगे नौसेना के टॉप कमांडर्स

नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना के टॉप कमांडर की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यहां नौसेना के कमांडर्स समुद्री सुरक्षा, परिचालन तैयारियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए रणनीतिक दिशा तय करेंगे। इसमें नौसेना का शीर्ष नेतृत्व, ऑपरेशनल कमांडर और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। यह नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस हैं।

दरअसल, भारतीय नौसेना 'कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2026' का पहला संस्करण आयोजित करने जा रही है। नौसेना के मुताबिक, यह 'कमांडर्स कॉन्फ्रेंस' नई दिल्ली में 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक आयोजित की जाएगी। नौसेना प्रमुख और अन्य वरिष्ठ कमांडर वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों का गहन विश्लेषण करेंगे। बहुआयामी चुनौतियों से निपटने की रणनीतियों की समीक्षा करेंगे। सम्मेलन में ब्लू-वॉटर क्षमताओं के विस्तार, आधुनिक प्रशिक्षण, मानव संसाधन प्रबंधन, प्लेटफॉर्म्स की युद्धक तैयारियों और टिकाऊ रखरखाव प्रणाली पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही, बिना चालक वाले सिस्टम्स और उन्नत तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर भी विशेष जोर रहेगा।

यह सम्मेलन 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद नौसेना की ऑपरेशनल सिद्धांतों की पुष्टि, तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को मजबूत करने व तकनीक आधारित प्रतिक्रिया तंत्र को और प्रभावी बनाने के दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व रखता है। यह तीन दिवसीय महत्वपूर्ण सम्मेलन नौसेना भवन में आयोजित होगा, जिसमें नौसेना के शीर्ष नेतृत्व, ऑपरेशनल कमांडर और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।

गौरतलब है कि यह सम्मेलन समुद्री सुरक्षा, परिचालन तैयारियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए रणनीतिक दिशा तय करने का प्रमुख मंच माना जाता है। इस बार यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक समुद्री परिदृश्य जटिल बना हुआ है। भारत की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से होकर गुजरता है। यही कारण है कि इन मार्गों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंद महासागर क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय बलों की सक्रियता और बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा ने नौसेना की जिम्मेदारियों को और अधिक बढ़ा दिया है।

इस संदर्भ में सम्मेलन के दौरान त्वरित तैनाती, समुद्री निगरानी और संकट के समय समन्वित प्रतिक्रिया पर विशेष फोकस रह सकता है। इस महत्वपूर्ण नौसैनिक सम्मेलन में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और गृह सचिव भी शामिल होंगे। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखा जाएगा। इनके साथ विचार-विमर्श के माध्यम से तीनों सेनाओं के बीच तालमेल, संयुक्त संचालन और रणनीतिक समन्वय को मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा। यह मंच राष्ट्रीय नेतृत्व और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच संवाद को भी सुदृढ़ करेगा।

इस नौसैनिक सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधानों और डेटा-ड्रिवन तकनीकों की पर फोकस रहेगा। इन्हें नौसेना के संचालन में शामिल करने की दिशा में की गई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इससे निर्णय लेने की क्षमता, निगरानी प्रणाली और मिशन की सटीकता में सुधार होगा। सम्मेलन में स्वदेशीकरण, नवाचार और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के प्रयासों पर भी विचार किया जाएगा।

व्यापक स्तर पर यह सम्मेलन भारतीय समुद्री सिद्धांत के अनुरूप नौसेना की चारों भूमिकाओं यानी सैन्य, कूटनीतिक, पुलिसिंग और मानवीय गतिविधियों की समीक्षा करेगा। साथ ही, 'म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी अक्रॉस रीजन' यानी महासागर विजन को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है। इसके अलावा, हिंद महासागर व इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में प्राथमिक सुरक्षा साझेदार के रूप में भारतीय नौसेना की भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीसीएच

Share this story

Tags