समुद्र मंथन से जुड़ी है अनंत चतुर्दशी की कथा, निभाई जाती है भगवान को खोजने की रस्म
नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा कर सुख, शांति, धन और समृद्धि की कामना करते हैं। अनंत चतुर्दशी से जुड़ी कई परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं, जिनमें पंचामृत में अनंत भगवान को खोजने की परंपरा भी शामिल है।
यह व्रत समुद्र मंथन की धार्मिक मान्यता से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। अनंत चतुर्दशी की पूजा में अनंत भगवान को खीरे में बांधकर दूध, दही, घी, मधु और शक्कर से बने पंचामृत में रखकर उन्हें खोजने की परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान श्रद्धालु अनंत भगवान को खोजने की रस्म करते हैं। इस परंपरा को समुद्र मंथन से जोड़कर देखा जाता है।
मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और राक्षसों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया था। इससे अमृत और विष के कलश निकले। अमृत का संबंध भगवान विष्णु और विष का संबंध भगवान महादेव से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के हाथों में अमृत का कलश आया, जबकि विष का पान महादेव ने किया। इसके बाद संसार में खुशहाली की शुरुआत मानी गई।
इसी परंपरा से अनंत चतुर्दशी के व्रत को भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अनंत रूप में प्रकट हुए और भक्तों की रक्षा की। इसी कारण सदियों से इस दिन अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।
अनंत चतुर्दशी की पूजा में विशेष डोरी को 'अनंत' कहा जाता है, जिसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। इन गांठों को भगवान विष्णु के 14 रूपों का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के नामों का उच्चारण करते हुए अनंत को बांह पर धारण किया जाता है। पुरुष दाहिने बांह में जबकि महिलाएं बाईं बांह पर अनंत बांधती हैं। 14 गांठों वाला यह सूत्र रक्षा कवच की तरह काम करता है और संकटों से रक्षा करता है। इन 14 नामों का संबंध 14 लोकों से भी माना गया है। भगवान विष्णु के बताए गए 14 नाम हैं। अनंत, ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, वैकुंठ, श्रीधर, मधुसूदन, वामन, त्रिविक्रम, केशव, नारायण, दामोदर, गोविंद और ऋषिकेश।
मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से 14 वर्षों तक अनंत फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने भी अनंत चतुर्दशी का व्रत रखकर अपना खोया हुआ राजपाट प्राप्त किया था।
अंक शास्त्र में 14 को मूलांक 5 से जोड़ा जाता है, क्योंकि 1 और 4 का योग 5 होता है। अंक 5 का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है और बुध को बुद्धि, संवाद, तर्क, व्यापार और गणना का कारक माना गया है। कहा यह भी जाता है कि अनंत चतुर्दशी का व्रत सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को बताया था। उन्होंने यह व्रत रखा और इसके बाद सभी इस व्रत को रखने लगे।
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