'समुद्र मंथन मिशन' से गहरे समुद्री तेल-गैस अन्वेषण को मिलेगी नई गति, आईआईटी गुवाहाटी के साथ नवाचार को भी बढ़ावा दे रही है ऑयल इंडिया: चेयरमैन
गुवाहाटी, 10 सितंबर (आईएएनएस)। सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप्स के माध्यम से ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाओं को बढ़ावा देने पर लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में कंपनी की भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के साथ साझेदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऑयल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. रंजीत रथ ने गुरुवार को न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए गुरुवार को कहा कि कंपनी कई नवाचार-आधारित परियोजनाओं और स्टार्टअप्स पर आईआईटी गुवाहाटी के साथ काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इन पहलों में एक परियोजना कंपनी के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिसके तहत ऐसे एंजाइम विकसित किए जा रहे हैं जो बांस से बनने वाले इथेनॉल और अन्य जैव-आधारित उत्पादों की उत्पादकता तथा उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, "स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और नई तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित एमसी2+ इग्नाइट चैलेंज जैसे कार्यक्रम नवाचार को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। इससे उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग भी मजबूत होगा।"
डॉ. रंजीत रथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 'समुद्र मंथन मिशन' को भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस मिशन का उद्देश्य भारतीय समुद्री क्षेत्रों में गहरे और अति-गहरे पानी (डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर) में तेल एवं गैस की खोज को प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने इस मिशन की घोषणा करते हुए समुद्री ऊर्जा संसाधनों की खोज को नई दिशा देने की बात कही थी। इसके तहत भारतीय समुद्री क्षेत्र के लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अन्वेषण के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें देश के पूर्वी और पश्चिमी तट, विशेष आर्थिक क्षेत्र और अंडमान बेसिन जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
ऑयल इंडिया के सीएमडी ने कहा कि गहरे समुद्री क्षेत्रों में अन्वेषण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक व्यापक योजना तैयार की है, जिसके तहत लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस राशि में से करीब 2.4 अरब अमेरिकी डॉलर विशेष रूप से डेटा अधिग्रहण के लिए खर्च किए जाएंगे। गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस भंडार की संभावनाओं का आकलन करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले भूवैज्ञानिक और भूभौतिकीय डेटा का संकलन अत्यंत आवश्यक होता है। यह निवेश भविष्य के अन्वेषण अभियानों के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा।
समुद्र मंथन मिशन भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। भारत वर्तमान में अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में घरेलू तेल और गैस भंडारों की नई खोज आयात निर्भरता को कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
ऑयल इंडिया और आईआईटी गुवाहाटी जैसी संस्थाओं के बीच सहयोग, जैव-ईंधन और नई ऊर्जा तकनीकों पर अनुसंधान तथा समुद्री ऊर्जा संसाधनों की खोज के लिए सरकार की पहल यह संकेत देती है कि भारत पारंपरिक और उभरते दोनों ऊर्जा क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। इससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि नवाचार, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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