Samachar Nama
×

सलीम इंजीनियर ने नीट 2026 में हुई अनियमितताओं की निंदा की, स्वतंत्र जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के तहत मरकजी तालीमी बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने नीट यूजी 2026 परीक्षा में अनियमितताओं की कड़ी निंदा की है, जिसके कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
सलीम इंजीनियर ने नीट 2026 में हुई अनियमितताओं की निंदा की, स्वतंत्र जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के तहत मरकजी तालीमी बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने नीट यूजी 2026 परीक्षा में अनियमितताओं की कड़ी निंदा की है, जिसके कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

प्रो. सलीम इंजीनियर ने परीक्षा की शुचिता और निष्पक्षता को बनाए रखने में विफल रहने तथा चिकित्सा क्षेत्र में देश की सेवा करने के आकांक्षी लाखों छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने के लिए सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को जिम्मेदार ठहराया।

मीडिया को जारी एक बयान में तालीमी बोर्ड के चेयरमैन ने कहा, “हम नीट यूजी 2026 परीक्षा में हुई उन अनियमितताओं की कड़ी निंदा करते हैं, जिनके कारण इस परीक्षा को रद्द करना पड़ा। नीट परीक्षा देश की सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसमें हर साल 20 लाख से भी ज्यादा छात्र शामिल होते हैं। एक ऐसे ‘गेस पेपर’ जिसमें वास्तविक परीक्षा से मेल खाने वाले सवालों की बड़ी संख्या शामिल है, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा संचालित प्रक्रिया की निष्पक्षता में एक गंभीर सेंध का संकेत देता है।

उन्होंने कहा कि अनौपचारिक नेटवर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ऐसे बेहद सटीक 'गेस पेपर्स' की बिक्री और बड़े पैमाने पर उनका सर्कुलेशन, संगठित कदाचार की ओर इशारा करता है। इस तरह के पेपर लीक परीक्षा प्रणाली में जनता के भरोसे को कमजोर करते हैं, और छात्रों व अभिभावकों के बीच योग्यता तथा समान अवसर को लेकर विश्वास का गंभीर संकट पैदा करते हैं। हम इस विफलता के लिए सरकार और एनटीए को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हैं, जिसने लाखों नीट उम्मीदवारों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है।

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने आगे कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का नीट यूजी 2026 परीक्षा को रद्द करने और उसे दोबारा आयोजित करने का फैसला, साथ ही सरकार का इस मामले को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन को सौंपने का कदम, परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की गंभीरता की साफ तौर पर स्वीकारोक्ति है। हालांकि, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह निर्णय आवश्यक था लेकिन इसने लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए भारी मानसिक कष्ट और अनिश्चितता पैदा कर दी है।

उन्होंने कहा कि इस उल्लंघन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए और उनके साथ यथासंभव कठोरता से निपटा जाना चाहिए, ताकि यह एक मजबूत निवारक के रूप में काम कर सके। इसके साथ ही एनटीए और शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने वालों को इन असफलताओं की जवाबदेही स्वीकार करते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए और नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

मरकजी तालीमी बोर्ड के चेयरमैन प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि तथ्य का पता लगाने और सभी स्तरों पर जवाबदेही तय करने के लिए इस मामले की गहन, स्वतंत्र और समबद्ध जांच की तत्काल आवश्यकता है। हम अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि वे जांच प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करें और किसी भी ऐसे व्यक्ति या नेटवर्क के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करें जो कदाचार का दोषी पाया जाता है। हम परीक्षा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, निगरानी तंत्र को बेहतर बनाने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रणालीगत सुधारों की मांग करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार को शिक्षा मंत्रालय द्वारा पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञों की उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशों को तत्काल लागू करना चाहिए। इस समिति ने प्रवेश परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई थी और एक ऐसी प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया था जो 'सुरक्षित, छेड़छाड़-मुक्त और पारदर्शी' हो। नीट को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि टेस्टिंग प्रक्रिया के पूरे चक्र में मौजूद कमियों को दूर किया जाए, और समिति द्वारा सुझाए गए अनुसार, कदाचार को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।

--आईएएनएस

डीकेपी/

Share this story

Tags