एसआईआर पर भड़के सलीम इंजीनियर, बोले- 13 करोड़ वोटर्स के नाम काटना गंभीर अपराध
नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। जमात-ए-इस्लामी हिंद के वाइस प्रेसिडेंट प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही इसकी निष्पक्षता और मंशा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। साथ ही, उन्होंने सीईसी के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का समर्थन किया।
सलीम इंजीनियर ने कहा कि सबसे पहले बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की गई, जहां चुनाव काफी नजदीक थे और कम समय में इसे पूरा करने की कोशिश की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। इसके बाद कई अन्य राज्यों में भी एसआईआर की प्रक्रिया हुई और बंगाल में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल सामने आए।
उन्होंने चुनाव आयोग के भीतर सामने आई कथित आपसी शिकायतों का भी जिक्र किया। सलीम इंजीनियर ने कहा कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों के बीच हुई पत्राचार और उनके द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों पर ध्यान नहीं दिए जाने से एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया बड़ी संख्या में लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिश है।
सीईसी के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोके जाने और बीएनएस की धारा 163 लागू किए जाने के सवाल पर सलीम इंजीनियर ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों, फैसलों और रवैये के खिलाफ असहमति जताना नागरिकों का अधिकार है। अगर इस अधिकार को दबाने की कोशिश की जाएगी तो इससे समस्याएं और बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ था, लेकिन अब देश के अलग-अलग हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सलीम इंजीनियर ने दावा किया कि 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम अवैध तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए हैं और इसे उन्होंने गंभीर अपराध बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी योग्य नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने की है, ताकि कोई पात्र व्यक्ति मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। लेकिन एसआईआर के दौरान इसके उलट चयनात्मक और पक्षपातपूर्ण तरीके से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए।
सलीम इंजीनियर ने यह भी दावा किया कि कुछ ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं, जिनकी जांच की जानी चाहिए। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि ऐसे मतदाता कौन हैं और उन्हें किस प्रक्रिया के तहत सूची में शामिल किया गया। उन्होंने एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार पर असर न पड़े।
--आईएएनएस
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