सही अवसर से निखरती है प्रतिभा, पीएम मोदी ने कालिदास के श्लोक से दिया संदेश
नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर संस्कृत का सुभाषित शेयर किया। उन्होंने लिखा, "सच्ची प्रतिभा को जब सकारात्मक परिवेश मिलता है तो उससे अद्भुत ऊर्जा का संचार होता है। इससे जहां प्रयासों में सफलता मिलती है, वहीं जीवन भी सार्थक बनता है।"
प्रधानमंत्री की ओर से महाकवि कालिदास की ओर से रचित 'मालविकाग्निमित्रम्' नाटक से एक संस्कृत श्लोक, "पात्रविशेषे न्यस्तं गुणान्तरं व्रजति शिल्पमाधातुः। जलमिव समुद्रशुक्तौ मुक्ताफलतां पयोदयस्य॥" साझा किया गया है, जिसका हिंदी अर्थ है कि व्यक्ति या वस्तु की सार्थकता और उसका उत्थान इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार के पात्र या परिवेश को प्राप्त करती है, जिस प्रकार साधारण जल भी सीप के संपर्क में आने से अमूल्य मोती बन जाता है, उसी प्रकार उचित और सुयोग्य आश्रय मिलने पर सामान्य गुण भी परम श्रेष्ठता और प्रतिष्ठा को प्राप्त कर लेते हैं।"
'मालविकाग्निमित्रम्' कालिदास की ओर से रचित एक संस्कृत नाटक है, जिससे शुंग वंश के संस्थापक पुष्यमित्र शुंग और उसके पुत्र अग्निमित्र के समय के राजनीतिक घटनाचक्र तथा शुंग एवं यवन संघर्ष का जिक्र मिलता है।
पीएम मोदी की ओर से साझा किया गया यह श्लोक 'मालविकाग्निमित्रम्' नाटक के प्रथम अंक में है। जब दो नृत्य आचार्यों (गणदास और हरदत्त) के बीच अपने श्रेष्ठता को लेकर विवाद होता है, तब आचार्य गणदास की ओर से अपनी शिष्या मालविका की योग्यता पर भरोसा जताते हुए राजा अग्निमित्र के सामने यह श्लोक, "पात्रविशेषे न्यस्तं गुणान्तरं व्रजति शिल्पमाधातुः। जलमिव समुद्रशुक्तौ मुक्ताफलतां पयोदस्य॥" कहा जाता है।
आचार्य गणदास की ओर से बोले गए श्लोक का अर्थ है कि शिक्षक या कलाकार की कला (शिल्प) जब किसी विशेष योग्य पात्र (उत्कृष्ट शिष्य) को सौंपी जाती है, तो उसकी गुणवत्ता और अधिक बढ़ जाती है। ठीक उसी तरह जैसे बादल (पयोद) से गिरने वाली पानी की बूंद जब समुद्र की सीप (शुक्ति) में गिरती है, तो वह मूल्यवान मोती (मुक्ताफल) बन जाती है।
--आईएएनएस
एसडी/वीसी

