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सहारनपुर मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के स्टेट सेक्रेटरी अमीनुल हक बोले-'हमें देश के लोगों से उम्मीद'

सहारनपुर मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के स्टेट सेक्रेटरी अमीनुल हक बोले-'हमें देश के लोगों से उम्मीद'
सहारनपुर मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के स्टेट सेक्रेटरी अमीनुल हक बोले-'हमें देश के लोगों से उम्मीद'

कानपुर, 11 सितंबर (आईएएनएस)। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के स्टेट सेक्रेटरी मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला ने सहारनपुर मस्जिद मामले पर सवाल उठाया, इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की और कहा कि संगठन इस मामले को हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगा।

मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला ने कहा, "सरकार, प्रशासन और चाहे जनता, किसी की तरफ से भी बिना कानून का पालन किए एक्टिविटी की जाती है तो यह गलत है। सहारनपुर में असंवैधानिक तरीके से मस्जिद गिराई गई। इस मामले में कोर्ट की गाइडलाइंस का बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया है। जिला अदालत ने एक महीने में 17 बार केस की सुनवाई की है। दो तारीख को कोर्ट का फैसला आता है, जिसमें गिराने की बात नहीं है। दो दिन अंदर ही प्रशासन की ओर से मस्जिद गिरा दी जाती है। हाईकोर्ट तक जाने का मौका नहीं दिया गया।"

अमीनुल हक अब्दुल्ला ने कहा, "देश का समाज इस नाइंसाफी को बिल्कुल भी स्वीकार करने को तैयार नहीं है। हम लोग इस मामले में हर तरह की कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। हमारी भावना है कि हम इस देश का हिस्सा हैं। हम यहीं पैदा हुए हैं और यहीं मरना है। देश की तरक्की और देश को बनाने में हमारा किरदार है। अगर हमें जलील किया जा रहा है, तो ये सिर्फ एक समुदाय के साथ नहीं किया जा रहा है, ये देश के साथ नाइंसाफी की जा रही है।"

अमीनुल हक अब्दुल्ला ने कहा, "हमारे यहां नमाज से पहले वजू किया जाता है। पहले के जमाने में वजू के लिए मस्जिदों में कुआं बनाया जाता था। कुएं से पानी निकालकर वजू किया जाता था। जितनी भी 100-150 वर्ष पुरानी मस्जिदें हैं, ज्यादातर में कुआं मिलेगा। कुआं होना इस बात का प्रमाण है कैसे हो गया कि वहां मस्जिद नहीं थी। जिनके परदादा के नाम जगह है, उनके पास सारे पेपर मौजूद हैं। धर्म के नाम पर लोगों को कुछ दिन तक बेवकूफ बनाया जा सकता है, ज्यादा दिन तक नहीं बनाया जा सकता।

अमीनुल हक ने कहा, "भारत के बहुसंख्यक किसी भी सूरत में नाइंसाफी की स्वीकार नहीं करेंगे। सत्ता हमेशा किसी की नहीं रहती है। उनके हाथ में सत्ता है, वे जो भी चाहें करें। यह देश लोगों से है, सरकारों से नहीं है। बहुसंख्यक समझ रहे हैं कि यह गलत हुआ है। लेकिन जब सत्ता बदलेगी तो उनको भी ये दिन देखना पड़ेगा। हमको सरकार से उम्मीद नहीं है, देश के लोगों से उम्मीद है। देश के लोग नाइंसाफी को स्वीकार नहीं करेंगे।"

--आईएएनएस

एसडी/पीएम

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