सहारनपुर मस्जिद मामले को लेकर राहुल गांधी पर मौलाना शहाबुद्दीन का निशाना, चंद्रशेखर आजाद बोले- कार्रवाई राजनीति से प्रेरित
बरेली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन ने सहारनपुर की कचहरी मस्जिद के ध्वस्त किए जाने पर प्रतिक्रिया दी और उम्मीद जताई कि उच्च न्यायालय मस्जिद के पक्ष में फैसला देगा।
मौलाना शहाबुद्दीन ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "सहारनपुर मस्जिद मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सलमान खुर्शीद ने कुछ भी बयान देने से इनकार किया। यह बहुत ही अफसोसनाक पहलू है। मस्जिद और बाकी ईबादतगाहें भारत के जम्हूरी निजाम का हिस्सा हैं, जो हमारी कल्चर और तहजीब को उजागर करती हैं। इस पर हर व्यक्ति को आवाज उठानी चाहिए। मैं सहारनपुर के हिंदू भाइयों को मुबारकबाद देता हूं कि उन्होंने आवाज उठाई। यही हमारा भाईचारा है और यही साझी विरासत है।"
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा, "वर्ष 1910 में सहारनपुर कचहरी मस्जिद तामील हुई। इस मस्जिद को सुबह में जल्दबाजी करते हुए प्रशासन की ओर से बुलडोजर चलाकर गिरा दिया गया। इसके बाद देशभर के मुसलमान दुखी हैं और सरकार और सहारनपुर के जिला प्रशासन से सख्त नाराज हैं। इस मामले को लेकर मस्जिद इंतजामिया कमेटी की ओर से कोर्ट में मुकदमा दायर किया गया है। हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है, हमें उम्मीद है कि हाई कोर्ट का फैसला मस्जिद के पक्ष में आएगा और उसी जगह पर दोबारा मस्जिद बनाई जाएगी।"
सेवा संकल्प यात्रा को लेकर मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी की ओर से सेवा संकल्प यात्रा की शुरुआत की गई है। यह अच्छा कदम है और इसकी तारीफ की जानी चाहिए। सरकार की स्कीमें जनता के कल्याण के लिए होती हैं। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि जनता के हितों को ध्यान में रखकर काम करे। सेवा संकल्प यात्रा का मैं समर्थन करता हूं।"
सहारनपुर मामले को लेकर आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने कहा, "जितनी तेजी से कार्रवाई की गई है, वह राजनीति से प्रेरित लगती है। हम भी चाहते थे कि उसको सील कर दिया जाए। बेदखली का आदेश था, उसको ध्वस्त करने का नहीं था। लेकिन उसको ध्वस्त किया गया कि इससे विरोध हो और राजनीतिक माहौल बने। सहारनपुर के लोगों ने समझदारी दिखाई, उनका धन्यवाद करते हैं।"
--आईएएनएस
एसडी/एबीएम

