साधु-संतों ने मौलाना रशीदी की टिप्पणी को बताया निंदनीय, सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप
नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। साधु-संतों ने कांवड़ यात्रियों पर मौलाना रशीदी की टिप्पणी को निंदनीय बताया है। उन्होंने इन टिप्पणियों को समाज में बंटवारा करने वाला और सामाजिक सद्भाव के खिलाफ बताया और संत समाज की ओर से नाराजगी जाहिर की। दरअसल, मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ यात्रियों को आतंकी बताया है।
मिर्जापुर में डॉ. योगानंद गिरि ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि मौलाना साजिद रशीदी का बयान बेतुका और सनातन विरोधी है। भगवाधारी कांवड़ियों को आतंकवादी कहना इन लोगों की पुरानी मानसिकताओं में से एक रही है। भगवा को आतंकवाद कहना सनातन धर्म के किसी भी कार्य का उपहास करना है। इस प्रकार के लोग भारत देश के अंदर समरसता और आपसी भाईचारे में नफरत फैलाने का काम है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या कांवड़ यात्रा आज के समय का है? यह भारतवर्ष में प्राचीन काल से चली आ रही है। इस प्रकार के बयान देने वाले लोग सनातन को नीचा दिखाने और हिंदू-मुसलमान में दंगा कराने के लिए षड्यंत्र रचते रहते हैं।
महंत ने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत भारत के कई राज्यों के भीतर कांवड़ का वृहद स्वरूप होता है। इन राज्यों में अगर साजिद रशीदी चाहते हैं कि किसी प्रकार का दंगा हो, बवाल हो तो यह कदापि संभव नहीं है, क्योंकि भारत में सुशासन का राज है। जब लोग सफल नहीं हो पता तो साजिश रचना शुरू कर देता है।
इसी बीच, अयोध्या के सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने कहा, "मौलाना साजिद रशीदी एक आतंकी है और उनका संबंध उस अंतरराष्ट्रीय गिरोह से है जो भारत का विरोध करता है। जब भी कोई हिंदू त्योहार या उत्सव आता है, उन्हें इस तरह से फंड किया जाता है कि वे भारत के भीतर जाकर अशांति फैलाने का काम करें। उन्हें यहां के शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने के लिए भेजा गया है और उनका संबंध जिहाद और आतंकवाद से है। सावन के महीने में लाखों-करोड़ों कांवड़िये देश की भलाई और राष्ट्र की उन्नति के लिए जल लेकर पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निकलते हैं।"
--आईएएनएस
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