सबसे कम उम्र में बने कुलपति; डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में की थी जनसंघ की स्थापना
नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस)। जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 6 जुलाई को 125वीं जयंती है। उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता आशुतोष मुखर्जी न्यायाधीश, शिक्षाविद और कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति थे। उनका जन्म उस काल में हुआ था जब देश ब्रिटिश शासन की जंजीरों में जकड़ा था।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिर्फ 33 वर्ष की उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बन गए थे। इस पद पर वे चार वर्ष तक रहे। इसके बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने। वे कांग्रेस छोड़कर पूरी तरह हिंदू महासभा की ओर चले गए थे। जब कांग्रेस की ओर से विधायिका का बहिष्कार करने का फैसला किया गया तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद श्यामा प्रसाद ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और फिर जीत गए।
1937 के चुनावों के बाद वे हिंदू महासभा/निर्दलीय गुट के प्रमुख विपक्षी नेता बने थे। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को केंद्र सरकार में उद्योग और आपूर्ति मंत्री बनाया था लेकिन "लियाकत-नेहरू समझौते" के मुद्दे पर उन्होंने 6 अप्रैल 1950 को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेता श्री गोलवलकर गुरुजी से राय लेने के बाद 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की और पहले अध्यक्ष बने। भारतीय जनसंघ ने वर्ष 1952 के चुनाव में तीन सीटों पर विजय हासिल की थी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे पर सवाल उठाई थी। वे 'एक देश, एक विधान, एक प्रधान, एक निशान' के समर्थक थे।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी अनुच्छेद 370 के प्रबल विरोधी थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण रूप से भारत में विलय कराने के लिए संघर्ष किया। वर्ष 1953 में वे कश्मीर गए, जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 23 जून 1953 को 51 वर्ष की आयु में श्रीनगर में संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई थी।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर भाजपा पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और वैचारिक आयोजन करने वाली है। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 6 जुलाई को बंगाल का दौरा करेंगे और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। गृह मंत्री अमित शाह उनके पैतृक गांव भी जाएंगे।
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