सभी धर्मों का हो सम्मान, जबरन धर्मांतरण को हतोत्साहित किया जाए : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को धर्मस्थल से कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्थंगडी में स्थित सिरी मातृश्री औद्योगिक पार्क का उद्घाटन किया। इस दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि समृद्ध ग्रामीण भारत का सपना सिरी जैसी संस्थाओं के माध्यम से ही साकार हो सकता है, जिन्होंने आजीविका सृजन और उद्यमिता के माध्यम से हजारों महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को सशक्त बनाया है।
श्री क्षेत्र धर्मस्थल द्वारा प्रतिपादित मूल्यों पर बोलते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सभ्यता ने हमेशा सभी धर्मों का सम्मान किया है और इस बात पर जोर दिया कि भक्ति, धर्म के साथ ही सामाजिक सद्भाव से ही नैतिक शक्ति को बढ़ावा मिलता है।
धर्मनिरपेक्षता की भावना को संरक्षित करने के महत्व पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि सभी धर्मों के साथ समान सम्मान और गरिमा का व्यवहार किया जाना चाहिए, जबकि किसी भी प्रकार के जबरन धर्मांतरण को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा सांसद और सिरी के अध्यक्ष डॉ. डी वीरेंद्र हेगड़े की प्रशंसा करते हुए उनके जीवन को समाज के लिए एक संदेश बताया।
उन्होंने कहा कि लगभग छह दशकों से डॉ. हेगड़े ने यह प्रदर्शित किया है कि आध्यात्मिकता किस प्रकार रचनात्मक सामाजिक परिवर्तन की एक शक्तिशाली शक्ति बन सकती है।
उपराष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में हेमावती वी. हेगड़े के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक कार्य की सफलता जीवनसाथी के सहयोग और प्रतिबद्धता से ही संभव हो पाती है।
यह देखते हुए कि सिरी आज प्रत्यक्ष रूप से 3,000 से अधिक व्यक्तियों और अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 से अधिक लोगों की आजीविका का समर्थन करता है, जिनमें से अधिकांश वंचित पृष्ठभूमि की महिलाएं हैं, उपराष्ट्रपति ने इसे अपने सच्चे अर्थों में सामाजिक परिवर्तन बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सच्चा विकास मानव जीवन को स्पर्श करना चाहिए और समाज के हर वर्ग में गरिमा, अवसर और आत्मविश्वास का सृजन करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक नागरिक के लिए समावेशी विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का मूलमंत्र है। सिरी के विकास की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह संस्थान दृढ़ता, नवाचार, त्याग और समर्पण के माध्यम से निर्मित हुआ है और गुणवत्ता पर हमेशा केंद्रित रहा है।
उन्होंने नवउद्घाटित सिरी मातृश्री औद्योगिक पार्क के मानव-केंद्रित दृष्टिकोण की विशेष रूप से सराहना की, जिसमें महिला कर्मचारियों के लिए छात्रावास सुविधाएं, आवासीय क्वार्टर, बाल देखभाल सहायता प्रणाली, स्वच्छ रसोईघर, परिवहन सुविधाएं और कल्याणकारी सुविधाएं शामिल हैं।
सिरी द्वारा संचालित गतिविधियों की विविधता की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि संस्था ने पारंपरिक कौशल को आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था के विकास के लिए कुशल और करुणामय प्रबंधन आवश्यक है और सिरी द्वारा प्रशासन में वैज्ञानिक लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकल वोकल और आत्मनिर्भर भारत की भावना भारत के विकास पथ का मार्गदर्शन करनी चाहिए। सिरी को राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय मॉडल बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह संस्था दर्शाती है कि उद्योग सामाजिक रूप से जिम्मेदार, महिला-केंद्रित, पर्यावरण के प्रति जागरूक और अत्यंत मानवीय हो सकते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इसी प्रकार के ग्रामीण औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र पूरे देश में विकसित होंगे।
इससे पहले दिन में उपराष्ट्रपति ने धर्मस्थल स्थित श्री मंजुनाथ स्वामी मंदिर का दौरा किया, जहां उन्होंने प्रार्थना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने अन्नपूर्णा प्रसाद निलय का भी दौरा किया, भक्तों से बातचीत की और करुणा, समानता और भक्ति पर आधारित मंदिर की सामुदायिक सेवा और निशुल्क सामूहिक भोजन की अटूट परंपरा की सराहना की।
--आईएएनएस
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