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सबरीमाला सोना चोरी विवाद: विधायक कडाकम्पल्ली सुरेंद्रन ने खुद को पार्टी के आक्रामक रुख से किया अलग

तिरुवनंतपुरम, 22 जनवरी (आईएएनएस)। पूर्व देवस्वम मंत्री और सीपीआई (एम) के वरिष्ठ विधायक कडाकम्पल्ली सुरेंद्रन सबरीमाला सोने की चोरी के मामले में सत्ताधारी पार्टी के सबसे विवादित चेहरों में से एक बनकर उभरे हैं। गुरुवार को केरल विधानसभा के अंदर और बाहर हुई घटनाओं ने लेफ्ट फ्रंट के भीतर बढ़ती असहमति को उजागर किया।
सबरीमाला सोना चोरी विवाद: विधायक कडाकम्पल्ली सुरेंद्रन ने खुद को पार्टी के आक्रामक रुख से किया अलग

तिरुवनंतपुरम, 22 जनवरी (आईएएनएस)। पूर्व देवस्वम मंत्री और सीपीआई (एम) के वरिष्ठ विधायक कडाकम्पल्ली सुरेंद्रन सबरीमाला सोने की चोरी के मामले में सत्ताधारी पार्टी के सबसे विवादित चेहरों में से एक बनकर उभरे हैं। गुरुवार को केरल विधानसभा के अंदर और बाहर हुई घटनाओं ने लेफ्ट फ्रंट के भीतर बढ़ती असहमति को उजागर किया।

बुधवार को बढ़ते दबाव के बीच चुप्पी तोड़ते हुए सुरेंद्रन ने मीडिया से कहा कि वह मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के घर केवल एक बार गए थे। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने पोट्टी से कोई तोहफा या किसी तरह का फायदा नहीं लिया।

सबरीमाला सोने की चोरी के मामले में सीपीआई (एम) के तीन वरिष्ठ नेताओं और एक सीपीआई नेता सहित कुल 13 लोग इस समय न्यायिक हिरासत में हैं। गुरुवार को सुरेंद्रन ने स्पष्ट किया कि वह पोट्टी के पिता से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे के कार्यक्रम का पहले किया गया उल्लेख एक गलती थी।

पूर्व मंत्री ने जोर देकर कहा कि उस समय पोट्टी को आरोपी नहीं माना जाता था और उनके साथ उसका कोई गलत या अनुचित संबंध नहीं था। गुरुवार को राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया, जब सबरीमाला सोने की चोरी का मुद्दा विधानसभा की कार्यवाही पर छाया रहा।

जैसे ही विपक्ष ने सरकार पर नया हमला बोला, ट्रेजरी बेंच के विधायकों ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के साथ पोट्टी की एक तस्वीर दिखाकर ध्यान भटकाने की कोशिश की। इसे आरोपी की लेफ्ट से बाहर तक राजनीतिक पहुंच के सबूत के रूप में पेश किया गया।

जब सत्ताधारी मोर्चे ने विधानसभा में सोनिया गांधी और पोट्टी की तस्वीर को जवाबी हमले के तौर पर इस्तेमाल किया, तो सुरेंद्रन ने बाहर आकर बिल्कुल अलग रुख अपनाया। गुरुवार को पत्रकारों से दोबारा बात करते हुए सुरेंद्रन ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि सोनिया गांधी जानबूझकर किसी दागी व्यक्ति को अपने घर आने देंगी। इस बयान के जरिए उन्होंने विधानसभा के अंदर अपनी ही पार्टी के नेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोपों से खुद को अलग कर लिया।

यह विरोधाभास लोगों की नजर से नहीं बचा। जहां ट्रेजरी बेंच पोट्टी को लेकर राजनीतिक विवाद फैलाने की कोशिश कर रही थी, वहीं सुरेंद्रन ने जोर देकर कहा कि सोने की चोरी की जांच हाई कोर्ट की निगरानी में हो रही है और विपक्ष पर बेवजह राजनीतिक नाटक करने का आरोप लगाया।

सुरेंद्रन लगातार यह कहते रहे हैं कि सबरीमाला के प्रशासनिक कामकाज में देवस्वोम मंत्री की किसी तरह की दखल की जरूरत नहीं थी। इधर एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की जांच तेज होने और विपक्ष के हमले बढ़ने के बीच सुरेंद्रन का सतर्क और लगभग बचाव वाला रुख उन्हें विवाद के केंद्र में ले आया है।

सीपीआई (एम) नेतृत्व के दो अलग-अलग रुख विधानसभा के अंदर आक्रामक और बाहर संयमित ने सत्ताधारी मोर्चे के भीतर रणनीतिक मतभेद को साफ तौर पर उजागर कर दिया है।

जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ रहा है, यह घटनाक्रम दिखाता है कि सुरेंद्रन एक मुश्किल राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। यह विवाद पिनाराई विजयन सरकार के सामने सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक बन गया है, खासकर तब जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी

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