Samachar Nama
×

सबरीमाला मंदिर सोना चोरी मामला: एसआईटी रिपोर्ट में तंत्री की भूमिका पर गंभीर सवाल

तिरुवनंतपुरम, 10 जनवरी (आईएएनएस)। केरल के तिरुवनंतपुरम से सामने आई एसआईटी की रिपोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में हुए सोना चोरी मामले को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस पूरे मामले में सबरीमाला मंदिर के तंत्री राजीवरु की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सबरीमाला मंदिर सोना चोरी मामला: एसआईटी रिपोर्ट में तंत्री की भूमिका पर गंभीर सवाल

तिरुवनंतपुरम, 10 जनवरी (आईएएनएस)। केरल के तिरुवनंतपुरम से सामने आई एसआईटी की रिपोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में हुए सोना चोरी मामले को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस पूरे मामले में सबरीमाला मंदिर के तंत्री राजीवरु की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

तंत्री होने के नाते राजीवरु की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मंदिर की पवित्रता, आध्यात्मिक गरिमा और धार्मिक परंपराओं की रक्षा करना है, लेकिन जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस जिम्मेदारी के निर्वहन में गंभीर चूक हुई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि जब पहले आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को सोने की परत चढ़ी तांबे की प्लेटें देने का आदेश जारी किया गया, उस समय मंदिर की एक बेहद अहम परंपरा का पालन नहीं किया गया। सबरीमाला जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले 'देवता से अनुमति' लेने की धार्मिक प्रक्रिया अनिवार्य मानी जाती है। इस मामले में वह प्रक्रिया पूरी तरह से नजरअंदाज की गई। हैरानी की बात यह है कि मंदिर के तंत्री, जो कि सभी अनुष्ठानों और धार्मिक नियमों पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार रखते हैं, उन्होंने इस उल्लंघन को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

गिरफ्तारी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तंत्री की ओर से इस पूरे मामले में एक तरह की 'मूक अनुमति' दी गई। जांच एजेंसी का मानना है कि अगर तंत्री चाहते तो इस फैसले को उसी समय रोका जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे संदेह और गहरा हो जाता है कि आखिर इतनी बड़ी धार्मिक परंपरा को तोड़ने पर भी तंत्री ने चुप्पी क्यों साधे रखी?

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि तंत्री ने इस गंभीर अनुष्ठान उल्लंघन की जानकारी न तो त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड को दी और न ही इस पर कोई आपत्ति दर्ज कराई। देवस्वोम बोर्ड मंदिर प्रशासन से जुड़ा सर्वोच्च निकाय है और ऐसे मामलों को उसके संज्ञान में लाना अनिवार्य माना जाता है, लेकिन तंत्री की ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया, जो कि उनकी भूमिका और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है।

--आईएएनएस

पीआईएम/वीसी

Share this story

Tags