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रूसी तेल खरीद छूट के पीछे छ‍िपा है अमेर‍िका का स्‍वार्थ, भारत को खुद तय करनी होगी ऊर्जा नीति: डॉ. वाइल

रूसी तेल खरीद छूट के पीछे छिपा है अमेरिका का स्वार्थ, भारत को खुद तय करनी होगी ऊर्जा नीति: डॉ. वाइल
रूसी तेल खरीद छूट के पीछे छ‍िपा है अमेर‍िका का स्‍वार्थ, भारत को खुद तय करनी होगी ऊर्जा नीति: डॉ. वाइल

नई द‍िल्‍ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिमी एशिया के रणनीतिकार डॉ. वाइल अव्वाद ने आईएएनएस से बात करते हुए रूसी तेल खरीद को लेकर अमेर‍िका की ओर से दी गई छूट पर अपनी राय रखी। उन्‍होंने कहा क‍ि अमेरिका अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कर सकता है। आज राहत है, कल फ‍िर प्रत‍िबंध होंगे। बेहतर है क‍ि भारत अपने स्वतंत्र फैसले ले।

वाइल अव्वाद ने कहा क‍ि मेरा मानना है कि यह फैसला अमेरिका ने अपने हितों को ध्यान में रखकर लिया है। अमेरिका हमेशा अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति को प्राथमिकता देता है।

उन्‍होंने कहा क‍ि इतना जरूर है कि यह भारत के लिए एक बड़ी राहत है, इसमें कोई शक नहीं है। इससे भारत को तेल खरीदने के मामले में अधिक लचीलापन मिलेगा। चीन को भी इसका फायदा होगा। साथ ही, इससे भारत में तेल की लागत पर कुछ दबाव कम पड़ सकता है, जिससे आम लोगों के लिए डीजल और पेट्रोल की कीमतों में थोड़ी राहत मिलने की संभावना है।

फ‍िर भी मुझे नहीं लगता कि यह भारत के लिए बहुत बड़ी या स्थायी राहत है। अमेरिकी नीति को पूरी तरह समझने के लिए अभी और समय की जरूरत है। उन्‍होंने कहा क‍ि मेरे हिसाब से अब समय आ गया है कि भारत रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर स्वतंत्र और स्वायत्त फैसले ले। क्योंकि अमेरिका आखिरकार वही करेगा जो उसके अपने राष्ट्रीय हित में होगा।

वाइल अव्वाद ने कहा क‍ि आज अमेरिका ने छूट दे दी है लेकिन कल वह फिर से प्रतिबंध या टैरिफ लागू कर सकता है। दूसरी तरफ, किसी देश से तेल खरीदना एक लंबी अवधि का व्यापारिक और रणनीतिक फैसला होता है। अगर कोई देश बार-बार खरीद शुरू करे और फिर बीच में पीछे हट जाए, तो सबसे करीबी और दोस्ताना साझेदार भी दोबारा सोच सकता है कि वह किन शर्तों पर तेल बेचे।

इसलिए भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति के फैसले लंबी अवधि के हितों को ध्यान में रखकर लेने चाहिए, न कि सिर्फ अल्पकालिक राहत को देखकर।

--आईएएनएस

एवाई/पीएम

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