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आरएसएस मुस्लिम समुदाय की कुर्बानियों को नजरअंदाज कर रही है: सैयद आगा रूहुल्लाह

आरएसएस मुस्लिम समुदाय की कुर्बानियों को नजरअंदाज कर रही है: सैयद आगा रूहुल्लाह
आरएसएस मुस्लिम समुदाय की कुर्बानियों को नजरअंदाज कर रही है: सैयद आगा रूहुल्लाह

श्रीनगर, 13 जुलाई (आईएएनएस)। नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह ने देश की आजादी में मुस्लिम समुदाय के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पर मुस्लिम समुदाय के योगदान को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर आज देश में लोकतंत्र कायम है। एक शासन व्यवस्था है, अमन-चैन और शांति स्थापित है, तो इसका श्रेय उन लोगों को जाता है, जिन्होंने देश के लिए कुर्बानी दी। आज किसी के ऊपर पंचायत की जिम्मेदारी है, तो किसी के ऊपर किसी शहर की, तो इसका श्रेय अगर किसी को जाता है, तो उन लोगों को जाता है, जिन्होंने अपनी कुर्बानी दी थी।

उनके मुताबिक, हमें शख्सीराज को भी समझना होगा। जब कश्मीर की बात आती है, तो इन लोगों के सिद्धांत बदल जाते हैं। जब मुस्लिम समुदाय की कुर्बानी की बात आती है, तो ये लोग भूल जाते हैं। ये लोग मुस्लिम समुदाय के योगदान को याद नहीं रखना चाहते हैं। ये लोग मुस्लिम समुदाय की आजादी से जुड़ी तारीख को खत्म करना चाहते हैं। ये लोग जिक्र नहीं करना चाहते हैं कि किस तरह आजादी में मुस्लिम समुदाय ने योगदान दिया था।

उन्होंने कहा कि जब बात मुस्लिम समुदाय की कुर्बानी की होती है, तो ये लोग भूल जाते हैं। इन लोगों से बर्दाश्त नहीं होता है कि कैसे मुस्लिम समुदाय के लोग देश की आजादी में किसी भी प्रकार का योगदान दे सकते हैं। आरएसएस ने आजादी की लड़ाई में किसी प्रकार का योगदान नहीं दिया था। हिंदू-मुस्लिम और अन्य समुदाय के लोग भी आजाद-पसंद थे। आरएसएस इसी दुश्मनी को निभाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मैंने अपने पूर्व में दिए साक्षात्कार में भी इस बात को स्पष्ट किया था कि हम हॉर्स ट्रेडिंग के खिलाफ हैं। मेरे कितने भी मतभेद पार्टी के साथ क्यों ना हो, वो दूसरा विषय है। लेकिन, मैं हॉर्स ट्रेडिंग के खिलाफ हूं। मैं इस बात के खिलाफ हूं कि कोई लालच में आकर पार्टी को छोड़कर चला जाए। इस हुकूमत को कार्यकाल पूरा करने का समय दिया जाना चाहिए। अगर कोई किसी की बात से असहमत है तो उसके पीछे कोई ठोस सिद्धांत होना चाहिए। अभी तो मुख्यमंत्री ने सिर्फ एक ही शख्स के बारे में बात कही है। लेकिन, मेरे संज्ञान में कई लोग हैं। मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री को भी इस संबंध में आत्मचिंतन करना चाहिए कि आखिर उनकी स्थिति ऐसी क्यों हुई?

--आईएएनएस

एसएचके/एबीएम

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