कक्षा 2 की किताबों पर 9 हजार का बिल! चंडीगढ़ के पिता का वीडियो वायरल, महंगी स्टेशनरी पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो ने जबरदस्त बहस छेड़ दी है। शहर के एक अभिभावक द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो में उन्होंने अपने बच्चे की कक्षा 2 की किताबों, नोटबुक और स्टेशनरी पर आए करीब 9 हजार रुपये के बिल को दिखाते हुए नाराजगी जाहिर की है। इस वीडियो के सामने आने के बाद हजारों पैरेंट्स ने भी महंगी स्कूल सामग्री को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है।
वायरल वीडियो में पिता स्कूल के कैश काउंटर के बाहर खड़े नजर आते हैं और हाथ में पकड़ा बिल दिखाते हुए बताते हैं कि सिर्फ छह नोटबुक, कुछ स्टिकर और बेसिक स्टेशनरी के लिए उनसे इतनी बड़ी रकम ली गई। उनका कहना है कि इतनी छोटी-सी लिस्ट के लिए 9 हजार रुपये का खर्च बेहद चौंकाने वाला है और आम परिवारों के बजट पर भारी पड़ता है।
यह वीडियो Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गया है। जैसे-जैसे यह वीडियो लोगों तक पहुंचा, वैसे-वैसे बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भी अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए। कई लोगों ने कमेंट में लिखा कि स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों से ही किताबें और स्टेशनरी खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिससे कीमतें काफी बढ़ जाती हैं।
कुछ यूजर्स ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्कूलों में किताबों और कॉपियों के नाम पर मनमानी वसूली की जाती है। उनका कहना है कि एक ही प्रकार की नोटबुक बाजार में सस्ती मिल सकती है, लेकिन स्कूल से खरीदने पर उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बच्चों की शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर पारदर्शिता बेहद जरूरी है। अगर स्कूलों द्वारा किताबों और स्टेशनरी की कीमत तय की जाती है, तो उसका स्पष्ट विवरण अभिभावकों को दिया जाना चाहिए। साथ ही, उन्हें बाहर से सामग्री खरीदने की स्वतंत्रता भी होनी चाहिए, ताकि वे अपनी सुविधा और बजट के अनुसार विकल्प चुन सकें।
यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते खर्च और निजी स्कूलों की नीतियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। कई अभिभावकों ने संबंधित अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग भी की है, ताकि भविष्य में इस तरह की शिकायतें कम हो सकें।
फिलहाल, यह वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लगातार शेयर किया जा रहा है। इसने न केवल एक अभिभावक की परेशानी को उजागर किया है, बल्कि देशभर के लाखों परिवारों की उस चिंता को भी सामने लाया है, जो बच्चों की पढ़ाई के बढ़ते खर्च से जूझ रहे हैं।

