336 करोड़ की महाठगी: भारतीय ठग ने टेलर स्विफ्ट के पति समेत 64 अरबपतियों को चूना लगाया, ठगी का पैसा पाकिस्तान भेजा
अमेरिका में भारतीय मूल के निवेश सलाहकार सिद्धार्थ जवाहर को 35 मिलियन डॉलर से ज्यादा की पोंजी स्कीम चलाने के मामले में 11 साल की संघीय जेल की सजा सुनाई गई है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस घोटाले में 64 निवेशक प्रभावित हुए, जिनमें NFL स्टार और टेलर स्विफ्ट के पति ट्रैविस केल्स भी शामिल हैं। हालांकि, केल्स के निवेश की रकम या उन्हें हुए व्यक्तिगत नुकसान की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
38 वर्षीय सिद्धार्थ जवाहर टेक्सास की निवेश कंपनी Swiftarc Capital LLC से जुड़े थे। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, जुलाई 2016 से दिसंबर 2023 के बीच उन्होंने निवेशकों से 35 मिलियन डॉलर से ज्यादा जुटाए, लेकिन इसमें से करीब 10 मिलियन डॉलर ही वास्तविक निवेश में लगाए गए।
निवेशकों के पैसे का कैसे हुआ इस्तेमाल?
अमेरिकी अभियोजकों के मुताबिक, जवाहर ने 2015 के आसपास निवेशकों के पैसे को फिलिप मॉरिस पाकिस्तान (PMP) में लगाना शुरू किया। धीरे-धीरे करीब 99 फीसदी क्लाइंट फंड इसी एक निवेश में केंद्रित हो गया। जब इस निवेश की कीमत गिरने लगी तो निवेशकों को वास्तविक स्थिति बताने के बजाय उन्हें मुनाफे का दावा किया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, नए निवेशकों से मिले पैसे का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए भी किया गया। इसके अलावा रकम का इस्तेमाल प्राइवेट जेट से यात्रा, महंगे होटल, न्यूयॉर्क और ऑस्टिन में लग्जरी अपार्टमेंट, निजी क्लबों की सदस्यता, महंगे कपड़ों और महंगे रेस्तरां में खर्च के लिए किया गया।
ट्रैविस केल्स भी बताए गए पीड़ित
अदालत में अभियोजन पक्ष ने ट्रैविस केल्स का नाम भी इस मामले के पीड़ितों में लिया। केल्स ने जवाहर की कंपनी से जुड़े एक फंड में निवेश किया था। हालांकि, अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि उन्होंने कितनी रकम निवेश की थी या उन्हें कितना आर्थिक नुकसान हुआ। केल्स पर इस मामले में किसी तरह के गलत काम का आरोप नहीं है।
जनवरी में कबूला था अपराध
सिद्धार्थ जवाहर ने जनवरी 2026 में वायर फ्रॉड के तीन मामलों में अपना अपराध कबूल किया था। इसके बाद 15 सितंबर 2026 को मिसौरी के सेंट लुइस स्थित संघीय अदालत में उन्हें 11 साल की जेल की सजा सुनाई गई।
अदालत ने उन्हें पीड़ित निवेशकों को 31.35 मिलियन डॉलर की भरपाई करने का भी आदेश दिया है। जज जैकरी एम. ब्लूस्टोन ने मामले में हुए भारी आर्थिक नुकसान और लंबे समय तक चले धोखाधड़ी के आधार पर सजा सुनाई।
जांच में बाधा डालने की भी कोशिश
अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, अभियोग लगने के बाद जवाहर ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश भी की। उन पर एक पीड़ित को FBI के सामने अनुकूल बयान देने के लिए प्रभावित करने, अपनी इमिग्रेशन स्थिति और वित्तीय मामलों के बारे में झूठ बोलने तथा फोन से सबूत मिटाने की कोशिश करने के आरोप भी सामने आए।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जवाहर भारत से अमेरिका गए थे और 2005 से वहां बिना वैध इमिग्रेशन स्टेटस के रह रहे थे। मामले की जांच FBI और मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी कार्यालय ने की।

